CWG 2026: सचिन के 'गोल्डन पंच' पर झूम उठा भिवानी, मिताथल गांव में देर रात तक गूंजता रहा जश्न

भिवानी के मिताथल गांव में जैसे ही सचिन सिवाच जूनियर ने राष्ट्रमंडल खेलों की बाक्सिंग रिंग में स्वर्ण पदक जीता, पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। सचिन की जीत ने
भिवानी के मिताथल गांव में जैसे ही सचिन सिवाच जूनियर ने राष्ट्रमंडल खेलों की बाक्सिंग रिंग में स्वर्ण पदक जीता, पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। सचिन की जीत ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गांव को दीपावली जैसा माहौल दे दिया। सचिन के पिता अनिल सिवाच, मां सुमन, दादा-दादी और बहन ने टीवी के सामने सचिन की जीत का जश्न मनाया। घर में मिठाइयों की खुशबू फैल गई और बधाइयों की आवाजें गूंजने लगीं। सचिन ने 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में भारतीय सेना की महार रेजिमेंट के हवलदार के रूप में 3-2 के कांटे के मुकाबले में जीत हासिल की। जैसे ही अंतिम फैसला भारत के पक्ष में आया, पूरे गांव में जश्न की शुरुआत हुई। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हुए 'भारत माता की जय' के नारे लगाए। सचिन के कोच अनिल टेकराम और सोनू ने इसे वर्षों की मेहनत का फल बताया। खेल प्रेरक एवं अधिवक्ता राजनारायण पंघाल ने कहा कि सचिन का यह स्वर्ण केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं है, बल्कि हर उस परिवार के सपनों की जीत है, जिसने अपने बेटे को देश के लिए आगे बढ़ते देखने का सपना देखा। मिताथल की मिट्टी से निकला यह स्वर्णिम मुक्का अब पूरे हरियाणा और देश के लिए गर्व की नई पहचान बन गया है। सचिन की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार को गर्वित किया, बल्कि पूरे गांव के लोगों में एक नई ऊर्जा का संचार किया। गांव के लोग एकजुट होकर सचिन की जीत का जश्न मनाते रहे और उनकी उपलब्धियों पर गर्व महसूस किया। सचिन की मेहनत और संघर्ष ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इस जीत ने युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा का काम किया है।
















