Corruption in Gwalior: ग्वालियर नगर निगम के इंजीनियर को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया

मध्य प्रदेश के ग्वालियर नगर निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। पुलिस ने नगर निगम के एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को ठेकेद
मध्य प्रदेश के ग्वालियर नगर निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। पुलिस ने नगर निगम के एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को ठेकेदार से उसके रुके हुए बिलों का भुगतान कराने के लिए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए इंजीनियर की पहचान सुशील कटारे (62) के रूप में हुई है, जो नगर निगम ग्वालियर में कार्यरत थे और इस महीने की 31 तारीख को रिटायर होने वाले थे। यह मामला तब सामने आया जब ठेकेदार सचिन पचौरी ने एंटी-करप्शन एजेंसी से संपर्क कर एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि उनके द्वारा किए गए सिविल कार्यों के लगभग 36 लाख रुपये के बिल बकाया थे और इन बिलों को प्रोसेस करने के लिए कटारे ने 1% कमीशन, यानी 36,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। ठेकेदार ने पहले ही 30,000 रुपये की राशि इंजीनियर को दे दी थी, लेकिन कटारे बाकी बचे 6,000 रुपये के लिए लगातार दबाव बना रहे थे।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकायुक्त के एसपी निरंजन शर्मा ने शिकायत का सत्यापन कराने के बाद एक विशेष टीम का गठन किया। गुरुवार को नगर निगम कार्यालय में जाल बिछाया गया। जैसे ही ठेकेदार ने इंजीनियर सुशील कटारे को बाकी बचे 6,000 रुपये दिए, पहले से तैनात लोकायुक्त की टीम ने तुरंत दबिश देकर उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। इस कार्रवाई के दौरान केमिकल टेस्ट किया गया, जिसमें आरोपी के हाथ गुलाबी हो गए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उन्होंने रिश्वत ली थी। यह घटना ग्वालियर नगर निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है और इससे यह स्पष्ट होता है कि लोकायुक्त पुलिस भ्रष्टाचार के मामलों में कितनी गंभीरता से कार्रवाई कर रही है।
ग्वालियर नगर निगम में इस प्रकार की घटनाएं आम हो गई हैं, जिससे आम जनता में असंतोष बढ़ रहा है। ठेकेदारों का आरोप है कि बिना रिश्वत के उनके कामों का भुगतान नहीं किया जाता। यह मामला सिर्फ एक इंजीनियर की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्वालियर नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक बानगी है। लोकायुक्त पुलिस की इस कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि अन्य भ्रष्ट अधिकारियों में भी डर पैदा होगा और वे अपनी हरकतों से बाज आएंगे। इस घटना ने यह भी साबित किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जनता की आवाज को सुनने और कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
















