Divorce via Video Call: ऑस्ट्रेलिया में पति का कनाडा में बैठी पत्नी से तलाक

सूरत के न्यायालय ने एक अनोखी घटना में दो देशों में रह रहे एक दंपति के तलाक को वीडियो कॉल के माध्यम से मंजूरी दी है। यह मामला अहमदाबाद के शत्रुघ्न शर्मा द्वारा र
सूरत के न्यायालय ने एक अनोखी घटना में दो देशों में रह रहे एक दंपति के तलाक को वीडियो कॉल के माध्यम से मंजूरी दी है। यह मामला अहमदाबाद के शत्रुघ्न शर्मा द्वारा रिपोर्ट किया गया है। पति भारत में और पत्नी कनाडा में रह रही थी। दोनों के बीच विवाह 2015 में हिन्दू रीति रिवाज से हुआ था, लेकिन कुछ वर्षों बाद मतभेदों के कारण वे अलग रहने लगे थे। तीन साल से अधिक समय से वे एक-दूसरे से दूर थे और अंततः मार्च 2023 में सूरत के स्थानीय न्यायालय में तलाक का आवेदन दिया। इस दंपत्ति के कोई संतान नहीं है और दोनों ही नौकरीपेशा हैं। उनके बीच समय की कमी और बढ़ते मतभेदों के कारण उन्होंने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया।
पति ने ऑस्ट्रेलिया में रहते हुए अपनी मां को पावर ऑफ अटार्नी का अधिकार दिया, जबकि पत्नी ने कनाडा में अपने पिता को यह अधिकार सौंपा। इस प्रकार, दोनों ने कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए अपने-अपने प्रतिनिधियों को नियुक्त किया। तलाक के दौरान दोनों ने भारतीय दूतावास में उपस्थित होकर वीडियो कॉल के माध्यम से अपनी सहमति दी। न्यायालय ने हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 13बी के तहत इस तलाक को मान्यता दी। वकील अश्विन जोगडिया ने बताया कि गुजरात उच्च न्यायालय ने अप्रैल 2026 में एक महत्वपूर्ण दिशा निर्देश जारी किया था, जिसमें ट्रायल कोर्ट को तकनीकी सेवी, मानवीय और संवेदनशील निर्णय लेने के लिए निर्देशित किया गया था। यह मामला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक के उपयोग के माध्यम से तलाक की प्रक्रिया को सरल बनाने का भी एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
इस घटना ने यह स्पष्ट किया है कि वैश्विक स्तर पर रहने वाले भारतीय दंपत्तियों के लिए कानूनी प्रक्रियाएं कितनी जटिल हो सकती हैं। वीडियो कॉल के माध्यम से तलाक की मंजूरी ने यह दिखाया है कि कैसे तकनीक ने पारंपरिक कानूनी प्रक्रियाओं को बदल दिया है। यह मामला उन दंपत्तियों के लिए एक मिसाल बन सकता है जो विभिन्न देशों में रह रहे हैं और अपने संबंधों को समाप्त करने के लिए एक सरल और प्रभावी तरीका खोज रहे हैं। इस प्रकार की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि न्यायालय और कानून व्यवस्था समय के साथ कैसे विकसित हो रहे हैं और तकनीक के साथ तालमेल बिठा रहे हैं।
















