ED investigates 5.42 crore savings bank scam: पटना जीपीओ के 5.42 करोड़ के बचत बैंक घोटाले पर ईडी का शिकंजा

पटना जीपीओ के 5.42 करोड़ रुपये के बचत बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच शुरू कर दी है। यह मामला सात वर्ष पुराना है और इसमें धन शोधन से संबंधि
पटना जीपीओ के 5.42 करोड़ रुपये के बचत बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच शुरू कर दी है। यह मामला सात वर्ष पुराना है और इसमें धन शोधन से संबंधित गतिविधियों की जांच की जा रही है। ईडी ने इस मामले में सात लोगों को समन जारी किया है, जिनमें डाक सहायक मुन्ना कुमार, सुजय तिवारी, राजेश शर्मा, सुनील कुमार, आदित्य कुमार, पटना जीपीओ के तत्कालीन सीपीएम राजदेव प्रसाद और तत्कालीन डिप्टी सीपीएम अरुण कुमार झा शामिल हैं। ईडी की टीम ने पटना जीपीओ पहुंचकर मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच भी की है। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गबन की गई राशि का निवेश कहां किया गया और इससे किसे लाभ हुआ। प्रारंभ में इस घोटाले की राशि 50 लाख रुपये मानी गई थी, लेकिन विभागीय जांच के बाद यह बढ़कर 5.42 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह राशि 327 निष्क्रिय बैंक खातों से निकाली गई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि फिक्स्ड डिपाजिट और मंथली इनकम स्कीम के ऐसे खातों को निशाना बनाया गया, जिनमें वर्षों से कोई लेनदेन नहीं हुआ था। आरोप है कि खातों से निकासी ऑनलाइन माध्यम से की गई थी, जबकि मैन्युअल रूप से सभी निष्क्रिय खातों को बंद कर दिया गया था। कई कर्मचारियों पर कार्रवाई भी की गई थी। मुख्य आरोपित मुन्ना कुमार को निलंबित किया गया था। विभागीय जानकारी के अनुसार, मुन्ना कुमार ने 40 लाख रुपये और सुजय तिवारी ने 45 लाख रुपये विभागीय खाते में वापस जमा किए थे। आदित्य कुमार सिंह को सेवानिवृत्ति से पहले ही बर्खास्त कर दिया गया था।
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब अशोक नगर निवासी रेखा कुमारी ने लिखित शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जीपीओ के कुछ कर्मचारी ग्राहकों के बचत खातों से फर्जी तरीके से राशि निकाल रहे हैं। जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का पता चला। अधिकारियों का कहना है कि कोर बैंकिंग साल्यूशन (सीबीएस) प्रणाली लागू होने के कारण ही इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो सका, अन्यथा मामला लंबे समय तक दबा रह सकता था। जुलाई 2019 में घोटाले की जानकारी सामने आने के बाद विभागीय जांच शुरू की गई थी। इसके बाद 8 अगस्त, 2019 को सीबीआई को इसकी जांच के लिए पत्र लिखा गया था। 11 अक्टूबर, 2019 को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। अब ईडी की जांच शुरू होने के बाद यह माना जा रहा है कि मामले में धन शोधन और अवैध संपत्ति से जुड़े पहलुओं की भी गहन पड़ताल होगी। ईडी की कार्रवाई से इस बहुचर्चित घोटाले में कई नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
















