Legal Debate Intensifies Over Abusive Language Against PM Modi: पीएम नरेंद्र मोदी को अपशब्द बोलने पर कानूनी बहस तेज

नीरज तिवारी, नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों ने एक बार फिर कान
नीरज तिवारी, नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों ने एक बार फिर कानूनी बहस को जन्म दिया है। इस मामले में गाली देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने युवाओं को क्षमा करने की बात कही। इसके बावजूद, अभद्र टिप्पणी करने वालों के लिए अधिकतम सजा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के आधार पर नोएडा में एक लड़की के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई है, और पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि क्या किसी के खिलाफ अपशब्द बोलना भारतीय कानून के तहत अपराध है। इस संदर्भ में यह जानना आवश्यक है कि गाली देने को अपराध की श्रेणी में रखा जाए या नहीं। भारतीय संविधान में इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी गई है।
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 में कोई ऐसी धारा नहीं है जो हर प्रकार की गाली-गलौज या अपमानजनक भाषा को अपने आप अपराध घोषित कर दे। प्रत्येक मामले में अदालत या पुलिस यह देखती है कि टिप्पणी किस संदर्भ में की गई, बोलने वाले का इरादा क्या था और उससे क्या स्थिति उत्पन्न हुई। इस संदर्भ में धारा 352 लागू होती है, जिसमें दोष तब लगता है जब कोई जानबूझकर किसी का अपमान इस मंशा से करे कि सामने वाला व्यक्ति उकसकर शांति भंग करे। केवल अभद्र शब्द बोलना पर्याप्त नहीं है; यह साबित होना चाहिए कि आरोपी का व्यवहार हिंसा या अशांति फैलाने की मंशा से था। इस धारा के तहत अधिकतम सजा दो साल की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकती है। यदि अपमानजनक भाषा के साथ किसी के जीवन, प्रतिष्ठा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी जाती है, तो धारा 351 लागू होती है, जिसमें सामान्य मामलों में दो साल तक की सजा हो सकती है।
















