Gorakhpur Girl Murder Case: गोरखपुर बालिका हत्याकांड में दागी पुलिसकर्मियों की बनेगी सूची

गोरखपुर में बालिका के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले के बाद से पुलिस विभाग में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया क
गोरखपुर में बालिका के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले के बाद से पुलिस विभाग में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। गोरखपुर रेंज के डीआईजी डॉ. एस. चनप्पा ने सभी जिलों में दागी पुलिसकर्मियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस सूची में उन पुलिसकर्मियों का ब्योरा शामिल किया जाएगा, जो भ्रष्टाचार, महिला संबंधी अपराध, अनुशासनहीनता और अन्य गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट तैयार होने के बाद ऐसे कर्मियों का स्थानांतरण किया जाएगा और विभागीय जांच के मामलों का समयबद्ध निस्तारण भी सुनिश्चित किया जाएगा।
गोरखपुर के साथ ही देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज जिले के पुलिस कप्तानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे पुलिसकर्मियों का पूरा विवरण तैयार करें, जिन पर गंभीर आरोप लगे हैं या जिनके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। इस रिपोर्ट में शिकायतों का विवरण, निलंबन, विभागीय कार्रवाई, दंड और वर्तमान स्थिति का भी उल्लेख किया जाएगा। इसके अलावा, रात्रिकालीन पिकेट व्यवस्था की भी समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों से यह भी पूछा गया है कि प्रमुख मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर रात के समय वाहनों और संदिग्ध लोगों की प्रभावी जांच क्यों नहीं हो रही है। यह निर्णय कोतवाली कांड में उठे सवालों के बाद लिया गया है, जिसमें आरोपित 29 किलोमीटर तक पुलिस की निगरानी से गुजरता रहा।
डीआईजी डॉ. एस. चनप्पा ने बताया कि विभागीय जांच का सामना कर रहे पुलिसकर्मियों की सूची तैयार होने के बाद उनके स्थानांतरण की कार्रवाई की जाएगी। जिन मामलों में जांच लंबित है, उन्हें भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कोतवाली की घटना के बाद यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे पुलिसकर्मियों की समय-समय पर समीक्षा की जाए और आवश्यकता पड़ने पर उनके खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई की जाए। इससे पहले महुआचाफी कांड में भी 39 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई थी, जब पशु तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न करने के आरोप में उन्हें हटाया गया था। अब एक बार फिर पुलिस व्यवस्था की समीक्षा और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
















