Punjab Police resolves pending complaints: पंजाब पुलिस ने खत्म की पुरानी लंबित शिकायतें, हाई कोर्ट को डीजीपी का हलफनामा

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पंजाब पुलिस ने राज्य में लंबित शिकायतों के निस्तारण को लेकर एक महत्वपूर्ण दावा पेश किया है। पुलिस महानिदे
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पंजाब पुलिस ने राज्य में लंबित शिकायतों के निस्तारण को लेकर एक महत्वपूर्ण दावा पेश किया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की ओर से दाखिल हलफनामे में अदालत को जानकारी दी गई कि लंबित शिकायतों और जांचों के त्वरित निस्तारण के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया है। इस अभियान के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि 13 जुलाई 2026 से पहले प्राप्त किसी भी शिकायत का निस्तारण 27 जुलाई 2026 तक किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद हाई कोर्ट ने मामले में किसी अन्य आदेश की आवश्यकता नहीं समझी और याचिका का निस्तारण कर दिया।
जस्टिस एनएस शेखावत की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) के निर्देशों के आधार पर अदालत को बताया कि प्रदेशभर में लंबित शिकायतों और जांचों को समयबद्ध तरीके से निपटाने के लिए विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत पुराने मामलों की लगातार समीक्षा की जा रही है और उनके निस्तारण की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है। यह कदम शिकायतकर्ताओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि डीजीपी, पंजाब ने सभी पुलिस आयुक्तों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायतों की जांच करते समय कानून के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। जांच पूरी तरह से विधि के अनुरूप और निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए। इसके अलावा, पंजाब पुलिस ने आम लोगों की शिकायतों के प्रभावी निस्तारण के लिए 'पब्लिक ग्रीवांसेज रिड्रेसल पोर्टल' तैयार किया है, जो लोगों को शिकायत दर्ज कराने और उसके निस्तारण की प्रक्रिया के लिए सिंगल विंडो सुविधा उपलब्ध कराएगा। राज्यभर में 'समाधान कैंप' भी आयोजित किए जाएंगे, जहां पीड़ित पक्ष अपनी शिकायतें सीधे अधिकारियों के समक्ष रख सकेंगे और उनका मौके पर ही समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। हाई कोर्ट ने डीजीपी द्वारा दायर हलफनामे और राज्य सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि अब इस मामले में कोई और आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है।
















