Infrastructure Development in Ladakh: अनुच्छेद 370 हटने के बाद लद्दाख में सड़कों का जाल फैला

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से विकास की दिशा में एक नई कहानी लिखी जा रही है। कश्मीर तक वंदे भारत एक्सप्रेस का सपना अब साकार होता दिख रहा है, जबकि
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से विकास की दिशा में एक नई कहानी लिखी जा रही है। कश्मीर तक वंदे भारत एक्सप्रेस का सपना अब साकार होता दिख रहा है, जबकि लद्दाख में पिछले सात वर्षों में सड़क विकास ने अभूतपूर्व गति पकड़ी है। यह विकास न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है। हाल ही में जोजि ला टनल के सफल निर्माण के बाद, भूतल परिवहन मंत्रालय ने लेह बाइपास सड़क के निर्माण के लिए 990 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी है। यह सड़क लद्दाख के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। हालांकि, इस क्षेत्र में रेलमार्ग का सपना अभी भी अधूरा है, जो कि स्थानीय निवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग है।
लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से लगभग अठारह सौ किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण किया गया है। मंत्रालय और सीमा सड़क संगठन मिलकर इस क्षेत्र में सड़कों, पुलों और टनलों का निर्माण कर रहे हैं। लेकिन लद्दाख को रेलमार्ग से जोड़ने की योजना अभी तक आगे नहीं बढ़ पाई है। रेल मंत्रालय ने कश्मीर तक रेलगाड़ी पहुंचाने में सफलता हासिल की है, लेकिन लद्दाख तक पहुंचाने के लिए सर्वेक्षण और विभागीय प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने के अलावा कुछ नहीं किया गया है। पिछले वर्ष इस परियोजना का सर्वेक्षण पूरा हुआ था और डीपीआर तैयार की गई थी, लेकिन आगे की प्रक्रिया में कोई प्रगति नहीं हुई है।
लगभग 489 किलोमीटर लंबी बिलासपुर-मनाली-लेह रेलवे लाइन को सामरिक रेल कॉरिडोर के रूप में चिन्हित किया गया है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 1.31 लाख करोड़ रुपये है। परियोजना के अगले चरण की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है, जो वित्तीय स्वीकृतियों, पर्यावरणीय मंजूरियों और तकनीकी पहलुओं पर निर्भर करेगी। लद्दाख के निवासी फिरोज खान ने कहा कि लद्दाख तक रेल पहुंचाना उनकी पुरानी मांग है। सर्दियों में भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के कारण ट्रैफिक प्रभावित होता है। कश्मीर तक रेल पहुंचने से वहां विकास को गति मिली है, लेकिन लद्दाख में रेल पहुंचाने के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इस क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए, लद्दाख में रेल पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
















