Investigation Committee Formed: नियम तोड़कर बिजली कनेक्शन देने की जांच के लिए कमेटी गठित

कानपुर देहात के शिवली क्षेत्र में एक गंभीर मामले का खुलासा हुआ है, जहां नियमों का उल्लंघन करते हुए 120 बिजली कनेक्शन दिए गए हैं। इस मामले में निगम को 1.60 करोड़
कानपुर देहात के शिवली क्षेत्र में एक गंभीर मामले का खुलासा हुआ है, जहां नियमों का उल्लंघन करते हुए 120 बिजली कनेक्शन दिए गए हैं। इस मामले में निगम को 1.60 करोड़ रुपये की चपत लगने की शिकायत की गई है। इस शिकायत के बाद एक जांच कमेटी का गठन किया गया है, जो सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। शिकायतकर्ता राजू विद्यार्थी, जो महराजगंज के पतरावल निवासी हैं, ने शिवली उपकेंद्र में तैनात तत्कालीन जेई राकेश राय और संविदा कर्मी उदीप शर्मा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए 120 घरों में बिजली कनेक्शन दिए। राजू विद्यार्थी का कहना है कि इस प्रक्रिया में तकनीकी फिजिबल रिपोर्ट में वास्तविक दूरी को कम दिखाया गया, जिसके कारण निगम को भारी नुकसान हुआ। यह कनेक्शन पिछले साल अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच दिए गए थे। हालांकि, जेई राकेश राय ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कहा है कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार की गई थीं।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अधीक्षण अभियंता मनीष कुमार गुप्ता ने एक्सईएन टेस्ट प्रमोद कुशवाहा और एसडीओ झींझक को जांच कमेटी में शामिल किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट एक सप्ताह में मांगी गई है, ताकि इस मामले की सच्चाई का पता लगाया जा सके। कानपुर देहात में बिजली कनेक्शन से संबंधित इस तरह के मामलों की जांच करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसे उल्लंघनों को रोका जा सके। यह मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाता है।
इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे जांच प्रक्रिया को तेजी से पूरा करें। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला कानपुर देहात में बिजली वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट में सभी तथ्यों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करे, ताकि निगम को होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सके और भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो। इस मामले की जांच से यह भी पता चलेगा कि क्या अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के उल्लंघन हो रहे हैं।















