Iran sidelined: ईरान को कर दिया किनारे, जंग के बीच सऊदी-तुर्की-पाकिस्तान तीनों सुन्नी मुस्लिम देशों का गठजोड़

ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते की दिशा में तेजी से बढ़ते नजर आ रहे हैं। तीनों देशों के नेता शुक्रवार को
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते की दिशा में तेजी से बढ़ते नजर आ रहे हैं। तीनों देशों के नेता शुक्रवार को जेद्दा में इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए एकत्रित होंगे। इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस महत्वपूर्ण समझौते पर दस्तखत करेंगे। यह जानकारी एक सऊदी सेना के करीबी सूत्र ने दी है, जिसने अपनी पहचान उजागर नहीं की है। सूत्र के अनुसार, यह समझौता लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इसे तेजी से आगे बढ़ाने में मदद की है।
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच बढ़ती अस्थिरता के बीच इस गठजोड़ की संभावनाएं काफी चर्चा में हैं। पिछले कुछ महीनों में, इन तीनों सुन्नी मुस्लिम देशों ने अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर गुरुवार को सऊदी अरब पहुंचे हैं, जहां उनकी यात्रा शनिवार तक जारी रहेगी। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन भी शुक्रवार को जेद्दा पहुंचने वाले हैं। इससे पहले, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच 2025 में एक संयुक्त रक्षा समझौते की घोषणा की गई थी, जिसने इस क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को लेकर कई अटकलें तेज कर दी थीं।
इस समझौते के संदर्भ में, यह भी चर्चा हो रही है कि क्या इसमें परमाणु सहयोग से संबंधित कोई शर्तें शामिल हो सकती हैं, क्योंकि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं। पिछले जनवरी में, एक सऊदी सेना के करीबी सूत्र ने बताया था कि तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के रक्षा समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा। यह जानकारी उस समय आई थी जब तुर्की के एक अधिकारी ने संकेत दिया था कि अंकारा इस गठबंधन में शामिल होने को लेकर बातचीत कर रहा है। इस प्रकार, क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में यह समझौता कई महत्वपूर्ण सवालों को जन्म देता है और इसके संभावित प्रभावों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
















