Land Dispute Resolution in Himachal: भूमि विवादों का निपटारा, राजस्व विभाग में बदलाव

हिमाचल प्रदेश में भूमि विवादों के निपटारे के लिए राजस्व विभाग ने एक नई पहल की है। अब पारंपरिक चेन प्रणाली को छोड़कर अत्याधुनिक रोवर तकनीक का उपयोग किया जाएगा। य
हिमाचल प्रदेश में भूमि विवादों के निपटारे के लिए राजस्व विभाग ने एक नई पहल की है। अब पारंपरिक चेन प्रणाली को छोड़कर अत्याधुनिक रोवर तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह तकनीक जीपीएस आधारित है और इसके माध्यम से भूमि की पैमाइश की जाएगी। इस बदलाव से न केवल मानवीय गलतियों की गुंजाइश कम होगी, बल्कि अधिकारियों की मनमानी पर भी अंकुश लगेगा। वर्षों से लंबित भूमि विवादों का समाधान तेजी से किया जा सकेगा। रोवर तकनीक का प्रयोग पहले बंदोबस्त विभाग में किया गया था, और अब इसे राजस्व विभाग की सामान्य कार्यप्रणाली में शामिल किया जाएगा। इस तकनीक के माध्यम से जमीन की निशानदेही में सुधार होगा और विवादों में कमी आएगी।
राजस्व विभाग ने सिरमौर जिले में रोवर उपकरण का सफल परीक्षण किया है। इसके सकारात्मक परिणामों के बाद, अब इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना बनाई जा रही है। सेटलमेंट विभाग के कानूनगो और तहसीलदारों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है। अब अगले चरण में फील्ड अधिकारियों, पटवारियों और अन्य संबंधित कर्मचारियों को रोवर उपकरण के संचालन और डिजिटल सर्वेक्षण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद, प्रदेशभर में भूमि की निशानदेही पूरी तरह से रोवर तकनीक के आधार पर की जाएगी। यह कदम न केवल कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाएगा, बल्कि भूमि से जुड़े मामलों के निपटारे में भी तेजी लाएगा।
बंदोबस्त अधिकारी मनेश यादव ने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार होगा। भूमि विवादों में उल्लेखनीय कमी आएगी और भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण को नई गति मिलेगी। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि इस डिजिटल तकनीक से भू-अभिलेखों के डिजिटलाइजेशन में तेजी आएगी और पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। कई दशकों से चल रहे भूमि विवादों का समाधान संभव होगा, जिससे लोगों को राहत मिलेगी। यह कदम हिमाचल प्रदेश में भूमि प्रबंधन को एक नई दिशा देने वाला साबित होगा।
















