Mirwaiz's Reflection on PoK: पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों की कड़ी निंदा

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। गुलाम जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान सेना की दमनकारी नीतियों के खिलाफ मीरवाइज-ए-कश्मीर मौलवी मोहम्मद उमर फारूक ने इस्लामाबाद को एक स्पष्ट संद
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। गुलाम जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान सेना की दमनकारी नीतियों के खिलाफ मीरवाइज-ए-कश्मीर मौलवी मोहम्मद उमर फारूक ने इस्लामाबाद को एक स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने पाकिस्तान सरकार और गुलाम जम्मू कश्मीर के प्रशासन से अपील की है कि वे जनता की आवाज को दबाने के बजाय संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी और अन्य सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ तुरंत सार्थक संवाद शुरू करें। इसके साथ ही, उन्होंने निष्पक्ष जांच कराने और सभी नागरिकों के संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। मीरवाइज ने इस बात पर जोर दिया कि संवाद और सहयोग के माध्यम से ही समस्याओं का समाधान संभव है।
श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में शुक्रवार को नमाज के बाद मीरवाइज ने कहा कि पिछले डेढ़ महीने में हुई मौतें बेहद दुखद हैं और इन घटनाओं की पारदर्शी व निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग, चाहे वे श्रीनगर, मुजफ्फराबाद या दुनिया के किसी भी हिस्से में रहते हों, एक साझा इतिहास, संस्कृति और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े हुए हैं। ये लोग मातृभूमि के वास्तविक हितधारक हैं और उनके अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। मीरवाइज ने यह स्पष्ट किया कि स्थायी शांति केवल संवाद, संवैधानिक न्याय और सभी वर्गों के अधिकारों के सम्मान से ही संभव है।
मीरवाइज ने पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों और प्रवासियों के मतदान अधिकार की भी बात की। उन्होंने कहा कि इन अधिकारों को राजनीतिक सौदेबाजी का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। यह आवश्यक है कि पाकिस्तान सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे और कश्मीरी लोगों के अधिकारों की रक्षा करे। मीरवाइज के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि कश्मीर के मुद्दे पर एक सकारात्मक और समावेशी संवाद की आवश्यकता है, जिससे सभी पक्षों के हितों का ध्यान रखा जा सके। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि वे एक साथ मिलकर इस दिशा में कदम बढ़ाएं।
















