New Industries in Western Ghats: केंद्र का नया मसौदा, 3,000 गांव आएंगे दायरे में; खनन-टाउनशिप पर सख्ती

पश्चिमी घाट के क्षेत्र में अब नए उद्योगों की स्थापना पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नया मसौदा पेश किया है। इस मसौदे के अनुसार, पश्चिमी घाट के करीब 3,000
पश्चिमी घाट के क्षेत्र में अब नए उद्योगों की स्थापना पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नया मसौदा पेश किया है। इस मसौदे के अनुसार, पश्चिमी घाट के करीब 3,000 गांवों में नई खदानें, बड़े टाउनशिप, रेड कैटेगरी के उद्योग और नए थर्मल पावर प्लांट नहीं लगाए जा सकेंगे। यह निर्णय पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) के रूप में पश्चिमी घाट के 56,825.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को घोषित करने के लिए लिया गया है। इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव कर्नाटक के 1,449 गांवों पर पड़ेगा, जबकि महाराष्ट्र के 1,133 गांव भी इस दायरे में शामिल होंगे। केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि इस निर्णय से स्थानीय निवासियों के घर, कृषि भूमि, कृषि गतिविधियों और संपत्ति के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे। इसके साथ ही, लोगों और राज्यों से 60 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
पश्चिमी घाट का क्षेत्र कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, गोवा और गुजरात जैसे राज्यों में फैला हुआ है। यह क्षेत्र उन जल स्रोतों का घर है, जो भारत की प्रमुख नदियों जैसे गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, तुंगभद्रा, भीमा, पेरियार और नेत्रावती को जन्म देते हैं। पश्चिमी घाट को दुनिया के 8 सबसे बड़े बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट्स में से एक माना जाता है और इसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के रूप में मान्यता प्राप्त है। यहां 7,400 से अधिक पौधों की प्रजातियां और हजारों जानवरों की प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से कई ऐसी हैं जो अन्यत्र नहीं मिलतीं। यह क्षेत्र अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है और इसके संरक्षण की आवश्यकता है।
















