NGT Order: यूपी में बूढ़ी गंगा नदी का उद्गम खोजने का निर्देश

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हाल ही में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है, जिसमें उत्तर प्रदेश में बूढ़ी गंगा नदी के उद्ग
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हाल ही में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है, जिसमें उत्तर प्रदेश में बूढ़ी गंगा नदी के उद्गम स्थल की पहचान करने के लिए कहा गया है। एनजीटी ने यह निर्देश दिया है कि एनएमसीजी को गंगा नदी या उसकी किसी सहायक नदी में मिलने तक बूढ़ी गंगा के पूरे रास्ते की पहचान करते हुए एक हलफनामा दाखिल करना होगा। यह आदेश बुधवार को जारी किया गया, जिसमें एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि यह हलफनामा सुनवाई की अगली तारीख 16 अक्तूबर से कम से कम एक हफ्ते पहले प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इस आदेश के पीछे का कारण बूढ़ी गंगा नदी पर अतिक्रमण से संबंधित मामले का निपटारा करना है। एनजीटी ने पहले ही अधिकारियों को नदी के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन करने का निर्देश दिया था।
यूपी के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा कायाकल्प आदेश, 2016 के तहत एनआईएच (एनआईएट) रुड़की की रिपोर्ट के आधार पर नदी के बाढ़ वाले इलाके के सभी चार हिस्सों में सीमा पिलर लगाने का काम 30 अगस्त 2026 तक पूरा करने का प्रस्ताव है। मुजफ्फरनगर जिले में सभी 277 पिलर लगा दिए गए हैं, जबकि मेरठ और हापुड़ जिलों में 50 फीसदी से अधिक काम पूरा हो चुका है। इस संदर्भ में याचिकाकर्ता ने राज्य अधिकारियों द्वारा बताए गए उद्गम स्थल को गलत बताते हुए दावा किया है कि उसके पास 200 साल पुराना एक प्रामाणिक नक्शा है, जिसके अनुसार नदी मुजफ्फरनगर के देवल गांव से निकलकर हापुड़ जिले के गढ़मुक्तेश्वर तक बहती है।
















