Pataliputra Greenfield Satellite Township: 66 लाख लोगों को मिलेगा नया घर, साल 2047 तक का मास्टरप्लान तैयार

राज्य ब्यूरो, पटना। पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप का विकास एक विशाल परियोजना के रूप में किया जा रहा है, जो लगभग 81,730 एकड़ (करीब 33,070 हेक्टेयर) क्षे
राज्य ब्यूरो, पटना। पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप का विकास एक विशाल परियोजना के रूप में किया जा रहा है, जो लगभग 81,730 एकड़ (करीब 33,070 हेक्टेयर) क्षेत्र में फैलेगी। इस टाउनशिप में भविष्य में 66.10 लाख लोगों के रहने की क्षमता होगी। प्रारंभिक चरण में, इस टाउनशिप के लिए 25 लाख लोगों की आबादी के अनुसार आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा, जिसे बाद में आवश्यकता के अनुसार बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में, इस विशेष क्षेत्र की जनसंख्या 2.45 लाख है और यहां मकानों की कुल संख्या 52,910 है। हाल ही में जारी मास्टर प्लान में इस बात की जानकारी दी गई है कि कैसे इस टाउनशिप का विकास किया जाएगा।
नगर विकास एवं आवास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप की विकास योजना वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य एक आधुनिक, सुनियोजित, पर्यावरण अनुकूल और आत्मनिर्भर शहर का निर्माण करना है। इस योजना के तहत आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, संस्थागत, मनोरंजन और आधारभूत सुविधाओं के लिए अलग-अलग भूमि के प्रविधान किए गए हैं, ताकि संतुलित शहरी विकास सुनिश्चित हो सके। विभाग के अनुसार, इस योजना में मिश्रित भूमि उपयोग, सार्वजनिक परिवहन आधारित विकास, हरित क्षेत्रों का संरक्षण, ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, चरणबद्ध विकास और जलवायु के अनुकूल शहरी नियोजन पर विशेष जोर दिया गया है।
इस टाउनशिप के विकास में अनियोजित और बिखरे हुए निर्माण को रोकने की भी व्यवस्था की गई है। सरकार का मानना है कि जब यह टाउनशिप पूरी तरह विकसित हो जाएगी, तब यहां 66 लाख से अधिक लोग आधुनिक सुविधाओं के बीच रह सकेंगे। कुल क्षेत्रफल 81,730 एकड़ (करीब 33,070 हेक्टेयर) है, जबकि अधिकतम आबादी क्षमता 66.10 लाख लोग है। प्रारंभिक आबादी 25 लाख लोगों की होगी, और योजना घनत्व 200 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर निर्धारित किया गया है, जबकि प्रारंभिक घनत्व 75 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर होगा। इस प्रकार, पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप एक महत्वपूर्ण शहरी विकास परियोजना के रूप में उभर रही है, जो आने वाले वर्षों में बिहार के शहरी परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है।















