Pending Cases in Courts: पिछले 10 साल से SC में 10 हजार और 30 साल से हाई कोर्टों में 80 हजार मामले लंबित, सरकार ने दी जानकारी

नई दिल्ली। पिछले एक दशक में भारत की न्याय व्यवस्था में सुधार के लिए 9,800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने के बावजूद, सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्टों में
नई दिल्ली। पिछले एक दशक में भारत की न्याय व्यवस्था में सुधार के लिए 9,800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने के बावजूद, सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्टों में लंबित मामलों की संख्या में कमी नहीं आई है। सुप्रीम कोर्ट में 10,000 से अधिक मामले ऐसे हैं जो 10 साल से अधिक समय से लंबित हैं। इनमें से 558 मामले 20 साल से अधिक और 26 मामले 30 साल से भी अधिक समय से अदालतों में पड़े हुए हैं। इसके अलावा, देश के 25 हाई कोर्टों में 80,000 से अधिक मामले तीन दशकों से भी अधिक समय से लंबित हैं। यह स्थिति न्याय व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाती है और इसके सुधार के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता को उजागर करती है।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने हाल ही में संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि मामलों के निपटारे की जिम्मेदारी न्यायपालिका पर है, जिसने इन मामलों के निपटारे के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं की है। उन्होंने कहा कि अदालतों में मामलों का समय पर निपटारा कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि जजों और न्यायिक अधिकारियों की संख्या, कोर्ट का सपोर्ट स्टाफ, फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, मामले की जटिलता, सबूतों की प्रकृति, और संबंधित स्टेकहोल्डर्स का सहयोग। यह सभी तत्व मिलकर न्यायालयों में मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।
















