Rainfall deficit in Punjab: पंजाब में 26 फीसदी बारिश कम, खेती और बिजली संकट का खतरा

पंजाब में इस वर्ष मानसून की शुरुआत ने किसानों और बिजली उत्पादन के लिए चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई महीने में राज्य मे
पंजाब में इस वर्ष मानसून की शुरुआत ने किसानों और बिजली उत्पादन के लिए चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई महीने में राज्य में सामान्य से 26 फीसदी कम बारिश हुई है। सामान्य बारिश 161.4 मिलीमीटर के मुकाबले इस बार केवल 119.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह कमी न केवल खेती के लिए, बल्कि बिजली उत्पादन के लिए भी गंभीर संकट का संकेत देती है। जून और जुलाई में बारिश की कमी का असर प्रमुख बांधों के जलस्तर पर भी पड़ा है। इससे आने वाले दिनों में सिंचाई के लिए पानी की कमी और बिजली उत्पादन में बाधा उत्पन्न होने की संभावना है। पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर और फरीदकोट को छोड़कर सभी जिलों में बारिश सामान्य से कम रही है। कई जिलों में बारिश की कमी 71 फीसदी तक दर्ज की गई है, जो कि किसानों के लिए चिंता का विषय है। पठानकोट में सबसे अधिक 495.5 एमएम बारिश हुई, जबकि मानसा में सबसे कम 38.4 एमएम बारिश दर्ज की गई। मानसा के अलावा मुक्तसर, बठिंडा, बरनाला, फतेहगढ़ साहिब और फाजिल्का जैसे जिलों में भी बारिश की कमी देखी गई है। इस स्थिति ने किसानों को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि वे अपनी फसलों के लिए आवश्यक जल की कमी का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, बिजली उत्पादन में भी कमी आने की संभावना है, जिससे राज्य में बिजली संकट उत्पन्न हो सकता है। इस वर्ष की बारिश की कमी ने राज्य के जल संसाधनों पर भी दबाव डाला है, जिससे आने वाले समय में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस प्रकार, पंजाब में बारिश की कमी ने न केवल कृषि क्षेत्र को प्रभावित किया है, बल्कि बिजली उत्पादन और जल संसाधनों के प्रबंधन में भी चुनौतियाँ खड़ी की हैं।
















