Supreme Court's Warning: युवाओं को शांत करने की जरूरत, नहीं तो बढ़ सकती है हिंसा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए सरकारी एजेंसियों को संयम बरतने की सलाह दी है। अदालत ने
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए सरकारी एजेंसियों को संयम बरतने की सलाह दी है। अदालत ने कहा कि यदि कुछ गुमराह लोग पत्थरबाजी भी करते हैं, तो भी युवाओं को शांत करने और उनके साथ संवाद करने की आवश्यकता है। अदालत का यह बयान उस समय आया है जब एक रिटायर्ड एयर फोर्स अधिकारी ने 20 जुलाई को होने वाले संसद चलो मार्च के आयोजकों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए इसे एक अन्य याचिका के साथ जोड़ दिया है। याचिकाकर्ता मनीष कुमार सोलंकी के वकील रिजवान अहमद ने अदालत में कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के हाई-सिक्योरिटी जोन में गड़बड़ी फैलाने के बावजूद आयोजक विभिन्न टीवी चैनलों पर भड़काऊ बयान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोग आग को बुझने नहीं दे रहे हैं।
वकील ने यह भी सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार इतनी अधिक झुक जाएगी कि राजस्थान की राज्य सरकार को भी छात्रों की मांगों को मानने के लिए झुकना पड़ेगा। उन्होंने उदाहरण दिया कि अगर लखनऊ में डिग्री कॉलेज के छात्र अपनी मांगों को लेकर बसों पर पत्थर फेंकने लगें, तो क्या उत्तर प्रदेश सरकार भी जरूरत से अधिक झुकेगी? इस पर सुनवाई कर रही बेंच ने कहा कि भले ही कुछ गुमराह तत्व पत्थर फेंकें, लेकिन युवाओं को शांत करने और उन्हें सही सलाह देने की आवश्यकता है।
















