Suspended Constable in Kotkhai Case: कोटखाई दुष्कर्म व हत्या मामले में सस्पेंड हुए कॉन्स्टेबल पर आरोप

शिमला के कोटखाई में छात्रा से दुष्कर्म और हत्या के मामले में पुलिस ने एक कॉन्स्टेबल दिनेश शांडिल्य को निलंबित कर दिया है। यह कॉन्स्टेबल नेपाली सूरज के मर्डर केस
शिमला के कोटखाई में छात्रा से दुष्कर्म और हत्या के मामले में पुलिस ने एक कॉन्स्टेबल दिनेश शांडिल्य को निलंबित कर दिया है। यह कॉन्स्टेबल नेपाली सूरज के मर्डर केस में गवाही देने वाला था और पिछले पांच वर्षों से चौपाल में सेवा दे रहा था। हाल ही में उसका तबादला शिमला के ननखड़ी थाने के लिए किया गया था, लेकिन अब उसे निलंबित कर दिया गया है। निलंबन के बाद कॉन्स्टेबल का नया मुख्यालय भी ननखड़ी निर्धारित किया गया है, जिसका मतलब है कि उन्हें अब ननखड़ी थाने में रिपोर्ट करना होगा। इस मामले में कॉन्स्टेबल के परिवार ने शिमला के एसपी गौरव सिंह पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। कॉन्स्टेबल के भाई सुरेश शांडिल्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि एसपी ने उन्हें पुलिस मुख्यालय बुलाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया है, जिससे उनकी स्थिति खराब हो गई है। सुरेश ने यह भी कहा कि उनके भाई का बेटा दिव्यांग है और उसकी देखभाल के लिए पिता की आवश्यकता है। इस कारण दिनेश ने चौपाल से तबादला न करने का आग्रह किया था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने नेताओं से एसपी को तबादला रुकवाने के लिए फोन करने की कोशिश की थी।
एसपी गौरव सिंह ने कॉन्स्टेबल के परिवार द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस कंडक्ट रूल्स के तहत कार्रवाई की गई है और निलंबन की प्रक्रिया जांच के बाद की गई है। सिंह ने यह भी कहा कि कॉन्स्टेबल द्वारा किए गए कई मिस कंडक्ट की जानकारी जांच में सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेताओं से फोन करवाना नियमों के खिलाफ है और इस मामले में उचित कार्रवाई की गई है। इस मामले में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस एक अनुशासित बल है और सभी कर्मचारी पुलिस महानिदेशक के अधीन आते हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर दिनेश शांडिल्य को निलंबन के संबंध में कोई शिकायत है, तो उन्हें पहले डीजीपी से शिकायत करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई होती है और किसी को भी मनमाने तरीके से निलंबित नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि यदि राज्यपाल की ओर से मामले में कोई टिप्पणी या निर्देश आता है, तो सरकार उसका सम्मान करते हुए मामले को देखेगी। इस तरह के मामलों में पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
















