Unemployment Crisis in Palamu: पलामू में बेरोजगारी की तस्वीर चिंताजनक, 79% लोग नौकरी की तलाश में; सर्वे में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

पलामू जिले में बेरोजगारी की स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा किए गए ''झारखंड बेरोजगारी सर्वेक्षण'' ने इस संकट की भयावहता को उजा
पलामू जिले में बेरोजगारी की स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा किए गए ''झारखंड बेरोजगारी सर्वेक्षण'' ने इस संकट की भयावहता को उजागर किया है। सर्वेक्षण के परिणामों के अनुसार, जिले में 79 प्रतिशत लोग रोजगार की तलाश में हैं, जबकि केवल 4 प्रतिशत लोगों के पास नियमित या अस्थायी रोजगार है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि बेरोजगारी की समस्या ने शिक्षित युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। सर्वे में शामिल 89 प्रतिशत से अधिक लोगों का मानना है कि समय के साथ बेरोजगारी की दर बढ़ी है, जिससे स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है।
ज्ञान विज्ञान समिति की पलामू इकाई ने बुधवार को जिला कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें अगस्त-सितंबर 2025 के दौरान जिले में 184 लोगों पर किए गए सर्वेक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इस सम्मेलन में जिला सचिव अजय कुमार साहू ने कहा कि सर्वेक्षण के परिणाम पलामू में रोजगार संकट की भयावह तस्वीर को दर्शाते हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सर्वे में शामिल अधिकांश प्रतिभागी शिक्षित हैं, जिनमें 48 प्रतिशत स्नातक या स्नातकोत्तर, 35.7 प्रतिशत इंटरमीडिएट और 15 प्रतिशत मैट्रिक तक शिक्षित हैं। इसके बावजूद, उन्हें रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
सर्वेक्षण में 47 प्रतिशत लोगों ने अच्छी नौकरी मिलने की संभावना को बहुत कम बताया, जबकि 31.5 प्रतिशत ने इसे लगभग असंभव माना। भविष्य को लेकर 33 प्रतिशत लोग अत्यधिक चिंतित हैं, 27 प्रतिशत को कोई उम्मीद नहीं दिखती और केवल 12 प्रतिशत लोग ही भविष्य को लेकर आशावादी हैं। रिपोर्ट में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के लिए खेती, कृषि आधारित उद्योग और कुटीर उद्योग को प्रभावी विकल्प बताया गया है। इसके साथ ही, स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए पूंजी, कौशल विकास प्रशिक्षण, बेहतर बाजार, भूमि और निर्बाध बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। समिति के प्रांतीय अध्यक्ष शिव शंकर प्रसाद ने कहा कि सर्वे का उद्देश्य केवल आंकड़े प्रस्तुत करना नहीं है, बल्कि सरकार और जिला प्रशासन का ध्यान पलामू की जमीनी हकीकत की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने रोजगार संबंधी नीतियों और योजनाओं के निर्माण में इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को शामिल करने की मांग की।
















