UP: दरोगा गवाही से छुट्टी पर, पॉक्सो मामलों में न्याय अटका

उत्तर प्रदेश में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामलों में न्याय की प्रक्रिया में बाधाएं आ रही हैं। फतेहपुर सीकरी, हरीपर्वत, अछनेरा और जगदीशपुरा थाने के मामलों में
उत्तर प्रदेश में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामलों में न्याय की प्रक्रिया में बाधाएं आ रही हैं। फतेहपुर सीकरी, हरीपर्वत, अछनेरा और जगदीशपुरा थाने के मामलों में चार्जशीट दाखिल करने वाले दरोगा सम्मन के बावजूद गवाही देने के लिए हाजिर नहीं हो रहे हैं। इस लापरवाही के चलते विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनिका चौधरी की अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। डीजीसी क्राइम आगरा राधा कृष्ण गुप्ता ने बताया कि विवेचकों द्वारा आरोपपत्र में मोबाइल नंबर दर्ज न करने के कारण अभियोजन पक्ष से सीधा संवाद नहीं हो पा रहा है, जिससे सम्मन तामील कराने में भी कठिनाई हो रही है। अदालत ने मैनपुरी, सहारनपुर, गाजियाबाद और आगरा के पुलिस कप्तानों को आदेश दिए हैं कि वे गवाही से भाग रहे दरोगाओं का वेतन रोकें। इसके साथ ही, उच्च अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इन दरोगाओं को अदालत में हाजिर कराने का प्रयास करें।
विशेष न्यायाधीश की अदालत में लंबित मामलों में से एक मामला थाना फतेहपुर सीकरी का है, जहां 2021 में जुगेंद्र के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवेचक दरोगा नीलकमल, जो वर्तमान में मैनपुरी के थाना एलाऊ में तैनात हैं, गवाही देने में विफल रहे हैं। अदालत ने गत 20 जुलाई को पुलिस अधीक्षक मैनपुरी को उनके वेतन रोकने का आदेश दिया था। इसी प्रकार, थाना हरीपर्वत में 2022 में राहुल के खिलाफ दर्ज मामले में विवेचक दरोगा अमित प्रसाद ने आरोप पत्र दाखिल किया था, लेकिन वह भी गवाही देने में अनुपस्थित रहे हैं। अदालत ने 13 जुलाई को सहारनपुर के एसएसपी को उनके वेतन रोकने का आदेश दिया।
















