Sentenced for Espionage: वसीउल्लाह खान को चार साल की सजा

लखनऊ की एनआईए कोर्ट ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के हैंडलरों को भारतीय सेना की संवेदनशील जानकारी भेजने वाले वसीउल्लाह खान को चार वर्ष की कैद की सजा सुना
लखनऊ की एनआईए कोर्ट ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के हैंडलरों को भारतीय सेना की संवेदनशील जानकारी भेजने वाले वसीउल्लाह खान को चार वर्ष की कैद की सजा सुनाई है। वसीउल्लाह खान, जो लखनऊ के राजाजीपुरम का निवासी है, को इसके साथ ही आठ हजार रुपये का जुर्माना भी भरना होगा। यह फैसला शुक्रवार को सुनाया गया, जब वसीउल्लाह ने अदालत में अपने अपराध को स्वीकार कर लिया था। एनआईए कोर्ट ने कहा कि यह मामला भारतीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा था, जिसके चलते सजा की मात्रा भी अपराध की गंभीरता के अनुरूप रखी गई। वसीउल्लाह खान का नाम यूपी एटीएस द्वारा 2023 में एक जासूसी नेटवर्क के खुलासे के दौरान सामने आया था, जब उसे पाकिस्तानी एजेंटों के साथ सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के जरिए संपर्क में पाया गया।
इस मामले की सुनवाई के दौरान एटीएस के संयुक्त निदेशक (अभियोजन) राजेश कुमार सिंह ने न्यायालय को बताया कि 25 सितंबर 2023 को एटीएस ने एक रिपोर्ट दर्ज की थी, जिसमें यह जानकारी दी गई थी कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी भारतीय सेना से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए कुछ लोगों को पैसों का लालच दे रही है। जांच के दौरान वसीउल्लाह खान और उसके साथी शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान का नाम सामने आया। दोनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया और वसीउल्लाह ने अदालत में अपने जुर्म को स्वीकार कर लिया। विशेष न्यायाधीश उमाकांत जिंदल ने अपने आदेश में कहा कि अभियुक्त ने स्वयं अपने अपराध को स्वीकार किया है, जिसके आधार पर उसे सजा सुनाई गई।
विशेष एनआईए कोर्ट ने यह भी कहा कि वसीउल्लाह खान की गतिविधियों ने देश की संप्रभुता और सुरक्षा को खतरे में डाल दिया था। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि दोषी ने प्रतिबंधित जानकारियां दुश्मन देश की एजेंसी को दी हैं, इसलिए उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील ने वसीउल्लाह की आर्थिक स्थिति और परिवार की जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए कम सजा की मांग की। इस मामले में वसीउल्लाह खान का साथी पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, और जांच अभी भी जारी है। यह मामला भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि जासूसी नेटवर्कों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
















