Yamuna Khadar Land Dispute: हाई कोर्ट के आदेश पर किसानों को सुनवाई के लिए नोटिस जारी

बागपत में यमुना खादर जमीन विवाद को लेकर हाई कोर्ट के आदेश पर नायब तहसीलदार सर्वे मोनिका यादव ने किसानों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस बागपत के मवीकलां और सोनी
बागपत में यमुना खादर जमीन विवाद को लेकर हाई कोर्ट के आदेश पर नायब तहसीलदार सर्वे मोनिका यादव ने किसानों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस बागपत के मवीकलां और सोनीपत के भैरा-बाकीपुर तथा बसंतपुर गांवों के किसानों के लिए है, जिन्हें 13 अगस्त को सुनवाई के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। इस सुनवाई में किसानों को अपने लिखित कथन, आपत्तियां, अभलेख और साक्ष्य आदि आठ अगस्त तक नायब तहसीलदार के कार्यालय में जमा कराने होंगे। नायब तहसीलदार ने स्पष्ट किया है कि यह सुनवाई का अंतिम अवसर होगा, जिसके बाद हरियाणा के किसानों के नाम जमीन दर्ज करने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
यमुना खादर में जमीन के इस विवाद की जड़ें काफी पुरानी हैं। यह मामला 1983 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री उमा शंकर दीक्षित की अध्यक्षता में गठित दीक्षित अवार्ड से जुड़ा हुआ है। दीक्षित अवार्ड ने यह निर्णय लिया था कि 1974-75 में जिन किसानों के नाम पर जमीन थी, वह जमीन उसी किसान की मानी जाएगी। यदि हरियाणा के किसानों की जमीन बागपत की ओर आती है, तो उनके नाम को यहां के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। इसी प्रकार, बागपत के किसानों का नाम सोनीपत के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा।
इस विवाद को लेकर भैरा-बाकीपुर और बसंतपुर के किसानों ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में रिट दायर की थी, क्योंकि उनका नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया था। अब हाई कोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश का सर्वे विभाग इस मामले की सुनवाई कर रहा है और इसे निस्तारित करने की प्रक्रिया में जुटा है। यह सुनवाई किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उनकी जमीन के अधिकारों का निर्धारण होगा और लंबे समय से चल रहे इस विवाद का समाधान निकलेगा।
















