Jasmin Lamboria wins gold: कॉमनवेल्थ गेम्स में जैस्मिन लंबोरिया ने गोल्ड पर जमाया कब्जा

महिला बॉक्सिंग में प्रीति पवार के गोल्ड मेडल जीतने के बाद भारतीय खेल प्रेमियों के लिए एक और बड़ी खुशखबरी आई है। 57 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में जैस्मिन लंबोरि
महिला बॉक्सिंग में प्रीति पवार के गोल्ड मेडल जीतने के बाद भारतीय खेल प्रेमियों के लिए एक और बड़ी खुशखबरी आई है। 57 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में जैस्मिन लंबोरिया ने नॉर्दर्न आयरलैंड की मिकेला वॉल्श के खिलाफ मुकाबला किया। इस मुकाबले में जैस्मिन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहले राउंड में ही अपनी बढ़त बना ली। पहले राउंड में पांच में से तीन जजों ने जैस्मिन के पक्ष में फैसला सुनाया, जिससे उन्हें शुरुआती बढ़त मिली। इसके बाद, जैस्मिन ने दूसरे राउंड में भी अपनी स्थिति मजबूत की और एक बार फिर से तीन जजों ने उनके पक्ष में फैसला दिया। इस प्रकार, वह 20-18 की बढ़त के साथ अंतिम राउंड में पहुंचीं। हरियाणा के भिवानी जिले को भारतीय बॉक्सिंग की नर्सरी कहा जाता है, और जैस्मिन इसी विरासत की एक चमकती मशाल हैं। एशियाई खेलों के गोल्ड मेडल विजेता हवा सिंह की परपोती होने के नाते, जैस्मिन के परिवार में भी मुक्केबाजी की परंपरा रही है। उनके चाचा संदीप सिंह और परविंदर सिंह भी राष्ट्रीय स्तर के बॉक्सर्स रहे हैं। जैस्मिन ने इस पारिवारिक विरासत से प्रेरणा लेकर मुक्केबाजी की दुनिया में कदम रखा और बहुत कम समय में अपनी पहचान बना ली।
जैस्मिन के करियर का पहला बड़ा पड़ाव 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल रहे, जहां उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। इस जीत ने उनके जीवन को एक नया मोड़ दिया और इसके बाद वह भारतीय सेना में शामिल होने वाली पहली महिला मुक्केबाज़ बनीं। उन्हें कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस (CMP) में शामिल किया गया और मिशन ओलंपिक विंग के तहत ट्रेनिंग दी गई। जैस्मिन ने सेना में शामिल होने पर कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है, लेकिन वह इसे अन्य महिला एथलीटों के लिए प्रेरणा बनने के अवसर के रूप में देखती हैं। पेरिस ओलंपिक के पहले दौर में बाहर होना उनके लिए बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट (ASI) में खुद को फिर से तराशा। उन्होंने अपनी स्ट्रेंथ, कंडीशनिंग और मानसिक मजबूती पर काम किया।
















