CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स में चला जादुमणि का जादू, भारत के लिए जीता सिल्वर मेडल

भारतीय बॉक्सिंग के उभरते सितारे जादुमणि सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अपने अद्वितीय प्रदर्शन से एक बार फिर से सबका ध्यान आकर्षित किया है। ग्लास्गो में आयोजित
भारतीय बॉक्सिंग के उभरते सितारे जादुमणि सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अपने अद्वितीय प्रदर्शन से एक बार फिर से सबका ध्यान आकर्षित किया है। ग्लास्गो में आयोजित इस प्रतियोगिता में शनिवार को जादुमणि ने पुरुष 55 किग्रा वर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के झाई डिक्सन के खिलाफ मुकाबला किया। पहले राउंड में जादुमणि ने शानदार खेल दिखाते हुए 3-2 से जीत हासिल की, लेकिन दूसरे राउंड में उन्हें पीछे हटना पड़ा। अंततः उन्हें 0-5 से हार का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। इस प्रकार, झाई डिक्सन ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। जादुमणि की इस उपलब्धि ने उनके करियर में एक और महत्वपूर्ण मोड़ लाया है।
जादुमणि सिंह का जीवन संघर्ष और मेहनत की एक प्रेरणादायक कहानी है। मणिपुर के इरोइशेम्बा गांव से आने वाले जादुमणि ने अपने बचपन में फुटबॉल के प्रति गहरी रुचि दिखाई, लेकिन परिवार के दबाव के कारण उन्हें पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना पड़ा। हालांकि, जादुमणि ने अपने चाचा के माध्यम से बॉक्सिंग की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत में उन्हें झिझक महसूस हुई, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे अपने करियर के रूप में अपनाया। मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान उनके परिवार ने उन्हें बॉक्सिंग की ट्रेनिंग जारी रखने के लिए पूरा समर्थन दिया, जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
2025 में ग्रेटर नोएडा में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स में 50 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीतने के बाद, जादुमणि ने 55 किग्रा वर्ग में जाने का साहसिक निर्णय लिया। उनके छोटे कद के कारण कई आलोचकों ने कहा कि वे बड़े मुक्केबाजों के सामने टिक नहीं पाएंगे। लेकिन जादुमणि ने अपनी मेहनत और लगन से सभी को गलत साबित करते हुए राष्ट्रीय चैंपियन बनकर बेस्ट बॉक्सर का खिताब जीता। इसके साथ ही, उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई, जो उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण का प्रमाण है। उनकी यह सफलता न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
















