Corporate Deal in UP: यूपी में कॉरपोरेट डील अब नहीं होगी आसान, कंपनियों के विलय व बंटवारे पर पहली बार लगेगा स्टांप शुल्क

उत्तर प्रदेश सरकार ने कंपनियों के विलय, विभाजन और अन्य कॉरपोरेट पुनर्गठन संबंधी लेनदेन के लिए पहली बार स्पष्ट स्टांप शुल्क व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने कंपनियों के विलय, विभाजन और अन्य कॉरपोरेट पुनर्गठन संबंधी लेनदेन के लिए पहली बार स्पष्ट स्टांप शुल्क व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की धारा 2(10) और अनुसूची-1(ख) में आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो नई व्यवस्था अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होगी।
प्रस्ताव के अनुसार, मर्जर और डीमर्जर के मामलों में स्टांप शुल्क दो आधारों में से जो अधिक होगा, उसके अनुसार लिया जाएगा। इसका अर्थ है कि यूपी में स्थित अचल संपत्ति के मूल्य पर निर्धारित प्रतिशत या शेयर मूल्य एवं प्रतिफल के 0.5 प्रतिशत में जो भी अधिक होगा, वही देय होगा। इस व्यवस्था से कॉरपोरेट लेनदेन में कानूनी स्पष्टता आएगी, जिससे मुकदमेबाजी में कमी आएगी और कारोबार करना सरल होगा।
सरकार का मानना है कि इस संशोधन से राज्य के राजस्व में सालाना लगभग 1000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि होगी। इसके अलावा, यह बड़े कॉरपोरेट निवेश को बढ़ावा देगा, नई कंपनियों को यूपी में आकर्षित करेगा और इससे हजारों नए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। इस प्रकार, यह कदम न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा, बल्कि व्यवसायिक वातावरण को भी सुधारने में सहायक सिद्ध होगा।



















