Forbes: भारत दूसरे स्थान पर, बेस्ट अंडर-ए बिलियन सूची में 27 कंपनियों के साथ

भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच एशिया-प्रशांत क्षेत्र की छोटी और मझोली कंपनियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। फोर्ब्स एशिया ने अपनी प्रति
भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच एशिया-प्रशांत क्षेत्र की छोटी और मझोली कंपनियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। फोर्ब्स एशिया ने अपनी प्रतिष्ठित बेस्ट अंडर-ए बिलियन सूची का 25वां संस्करण जारी किया है, जिसमें पिछले वर्षों की तरह चीन पहले स्थान पर है, जिसकी 28 कंपनियां शामिल हैं। भारत 27 कंपनियों के साथ दूसरे स्थान पर है। यह सूची उन सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनियों की है, जिनकी बिक्री एक करोड़ डॉलर से लेकर 1 अरब डॉलर के बीच है। इन 200 कंपनियों ने वित्तीय मानदंडों पर खरा उतरते हुए इस सूची में जगह बनाई है। इस सूची में उन व्यवसायों का दबदबा है, जो तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी क्षेत्र और वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) बूम के साथ कदमताल कर रहे हैं। सॉफ्टवेयर कंपनियों के साथ-साथ सेमीकंडक्टर के लिए प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक घटकों और उपकरणों के आपूर्तिकर्ता कुल योग्य कंपनियों का 25 फीसदी हिस्सा हैं। इसके अलावा, अन्य फर्में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती मांग के अनुरूप विशेष उपकरण और सेवाएं प्रदान कर रही हैं। जापान और ताइवान भी इस सूची में पीछे नहीं हैं, जहां प्रत्येक देश की 22-22 कंपनियां शामिल हैं। पिछले वर्ष भारत की 30 कंपनियां इस सूची में थीं, लेकिन इस बार संख्या में कमी आई है। फिर भी, भारत अब भी चीन के बाद दूसरे स्थान पर बना हुआ है। मलयेशियाई फर्मों की संख्या 19 हो गई है, जबकि पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और न्यूजीलैंड की पांच से कम कंपनियां ही इस सूची में जगह बनाने में सफल रहीं।
फोर्ब्स की इस सूची में शामिल कंपनियों में एक्यूटास केमिकल्स, अद्वैत एनर्जी ट्रांजिशंस, एजीआई इंफ्रा, ओरियनप्रो सॉल्यूशंस, आजाद इंजीनियरिंग, बीएसई, सीसीएल प्रोडक्ट्स, आइनॉक्स इंडिया, ग्रेविटा इंडिया और ईक्लर्कस सर्विसेज जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों का चयन 19,000 से अधिक सूचीबद्ध कंपनियों में से किया गया है। फोर्ब्स के अनुसार, इस सूची में स्थान पाने के लिए कंपनियों का चयन केवल राजस्व के आधार पर नहीं होता है, बल्कि कंपनियों के ऊपर कर्ज, उनके उत्पादों की बिक्री और प्रति शेयर आय की एक एवं तीन वर्ष की वृद्धि, साथ ही एक और पांच वर्ष के औसत रिटर्न ऑन इक्विटी जैसे कड़े वित्तीय मानकों के संयुक्त मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है। इस कारण इस सूची में जगह मिलना किसी कंपनी की वित्तीय मजबूती, प्रबंधन क्षमता और सतत विकास का महत्वपूर्ण वैश्विक प्रमाण माना जाता है।



















