Smart Cities of the Future: संवेदनशील शहरों की ओर बढ़ता मानवता का कदम

साल 2016 में, भारत सरकार ने 'स्मार्ट सिटीज मिशन' की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य जीवन की गुणवत्ता को सुधारना था। इस मिशन के तहत ऐसे शहरों का विकास किया जाना था,
साल 2016 में, भारत सरकार ने 'स्मार्ट सिटीज मिशन' की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य जीवन की गुणवत्ता को सुधारना था। इस मिशन के तहत ऐसे शहरों का विकास किया जाना था, जो आर्थिक रूप से समृद्ध, समावेशी और पर्यावरण के अनुकूल हों। अब, 2025 में, 1.64 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है और 8,067 परियोजनाओं में से 94 प्रतिशत पूरी हो चुकी हैं। लेकिन इस दौरान, दुनिया भी तेजी से बदल चुकी है। अब शहरों की अवधारणा में बदलाव आ रहा है, और संवेदनशील शहरों की ओर ध्यान दिया जा रहा है। ये शहर न केवल तकनीकी दृष्टि से उन्नत हैं, बल्कि इनमें रहने वाले लोगों की भावनाओं और जरूरतों को भी समझते हैं। प्रोफेसर केंट लार्सन ने इस नई अवधारणा को 'सेंटीएंट सिटीज़' के रूप में पेश किया है। उनका मानना है कि सिर्फ तकनीकी विकास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शहरों को मानवता की जरूरतों के अनुसार विकसित किया जाना चाहिए।
'सेंटीएंट सिटीज़' का विचार इस बात पर आधारित है कि शहरों को निवासियों के अनुभवों और भलाई को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जाना चाहिए। यह केवल आर्थिक बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित नहीं करते, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को भी महत्व देते हैं। इन शहरों का उद्देश्य एक ऐसा वातावरण बनाना है, जहां हर नागरिक को समान अवसर और संसाधन मिलें। वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट (WGS) के अनुसार, ये शहर मानव जरूरतों को समझते हैं और उनके अनुसार ढलते हैं। ऐसे शहर न केवल तकनीकी दृष्टि से उन्नत होते हैं, बल्कि रहने में आरामदायक और सुरक्षित भी होते हैं।



















