Cyber Fraud in Mumbai: MGL के नाम पर फर्जी APK से 63 करोड़ की ठगी का खुलासा

मुंबई पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी के गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने महानगर गैस लिमिटेड के नाम पर फर्जी apk फाइलों के जरिए लोगों से धोखाधड़ी की। पुलिस ने
मुंबई पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी के गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने महानगर गैस लिमिटेड के नाम पर फर्जी APK फाइलों के जरिए लोगों से धोखाधड़ी की। पुलिस ने 26 वर्षीय छात्र को गिरफ्तार किया है, जो इस गिरोह का मुख्य आरोपी है। आरोपी लोगों को फर्जी मैसेज भेजकर उन्हें धोखाधड़ी वाली APK फाइल डाउनलोड करने के लिए मजबूर करता था। इसके बाद, आरोपी मोबाइल बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी चुराकर लोगों के खातों से पैसे निकाल लेता था। पुलिस ने इस मामले की जांच तब शुरू की जब एक शिकायतकर्ता ने डीबी मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसके मोबाइल बैंकिंग की जानकारी चोरी कर 70,500 रुपये की धोखाधड़ी की गई। इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(C) तथा 66(D) के तहत मामला दर्ज किया।
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण का सहारा लिया और झारखंड से आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी के पास से पुलिस ने कई डिजिटल सबूत बरामद किए हैं, जिनमें 10 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, सात सिम कार्ड, चार क्रेडिट और डेबिट कार्ड, 967 फर्जी APK फाइलें और 37,200 लोगों की गोपनीय बैंकिंग जानकारी वाला डेटाबेस शामिल है। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी ने कुल 91 फर्जी APK फाइलें अन्य साइबर अपराधियों को बेची थीं, जिनका उपयोग कर देशभर में 5,912 लोगों को ठगा गया। इनमें से 512 लोग महाराष्ट्र के हैं। मुंबई पुलिस के अनुसार, इस पूरे साइबर नेटवर्क के जरिए अब तक लगभग 63 करोड़ 69 लाख 68 हजार 174 रुपये की धोखाधड़ी की गई है।
पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था मनोज कुमार शर्मा, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शैलेश बालकवाड़े और पुलिस उपायुक्त रागसुधा आर. के मार्गदर्शन में की गई। इस ऑपरेशन का नेतृत्व सहायक पुलिस आयुक्त ज्ञानेश्वर वाघ ने किया। कार्रवाई में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक नितिन दलवी, पुलिस निरीक्षक युवराज पाटिल, सहायक पुलिस निरीक्षक धनवेश पाटिल और अभिजीत देशमुख, पुलिस उपनिरीक्षक किरण देवरे, पुलिस हेड कांस्टेबल आनंद गावड़े तथा पुलिस कांस्टेबल दादासाहेब घोड़के, अतिश वाघमारे और जगदेव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फिलहाल, पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपी कौन हैं और इस फर्जीवाड़े का दायरा कितना बड़ा है।


















