Joyful Arrival: गुप्ता परिवार में 38 साल बाद गूंजी बेटी की किलकारी

जमुई के चकाई से एक सुखद तस्वीर सामने आई है, जहां एक परिवार ने 38 साल के लंबे इंतजार के बाद अपनी बेटी का स्वागत किया। इस घटना ने न केवल पारंपरिक सोच को चुनौती दी
जमुई के चकाई से एक सुखद तस्वीर सामने आई है, जहां एक परिवार ने 38 साल के लंबे इंतजार के बाद अपनी बेटी का स्वागत किया। इस घटना ने न केवल पारंपरिक सोच को चुनौती दी है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि बेटियों का जन्म किस प्रकार से समाज में खुशियों का संचार कर सकता है। अरविंद गुप्ता के घर जब नन्ही परी ने जन्म लिया, तो पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। चकाई रेफरल अस्पताल में जब काजल कुमारी ने बेटी को जन्म दिया, तो परिवार के सदस्यों ने खुशी से मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि बेटियों को केवल बोझ नहीं, बल्कि घर की लक्ष्मी माना जाना चाहिए। 38 वर्षों से इस परिवार में बेटी की प्रतीक्षा थी और जब वह आई, तो उसका स्वागत किसी राजकुमारी की तरह किया गया। फूलों और गुब्बारों से सजाई गई कार में बैंड-बाजा और आतिशबाजी के साथ उसे घर लाया गया। इस दृश्य ने सभी को भावविभोर कर दिया। घर पहुंचने पर नवजात का विधिपूर्वक गृह प्रवेश कराया गया, जिसमें परिवार के सभी सदस्य शामिल हुए। पिता विवेक गुप्ता ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' का संदेश देते हुए यह संकल्प लिया कि वे अपनी बेटी को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाएंगे। इस भव्य स्वागत ने मोहल्ले में यह संदेश फैलाया कि बेटियां केवल बोझ नहीं होतीं, बल्कि वे घर का असली उजाला और सौभाग्य होती हैं। इस घटना ने समाज में बेटियों के प्रति दृष्टिकोण को बदलने का एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जब समाज में बेटों के जन्म पर जश्न मनाया जाता है, वहीं बेटियों के आगमन पर मायूसी छा जाती है। ऐसे में गुप्ता परिवार का यह जश्न एक नई सोच का प्रतीक है। यह घटना न केवल परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बन गई है।



















