Havan and Satsang in Mahendragarh: गुरु पूर्णिमा पर महिलाओं को बांटे पौधे

नारनौल। विश्व हिन्दू परिषद मातृशक्ति टीम और पतंजलि महिला योग समिति ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हुडा सेक्टर एक में एक भव्य हवन और सत्संग का आयोजन किया। इस कार्यक
नारनौल। विश्व हिन्दू परिषद मातृशक्ति टीम और पतंजलि महिला योग समिति ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हुडा सेक्टर एक में एक भव्य हवन और सत्संग का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में वैदिक यज्ञ का संपन्न होना एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसमें स्थानीय महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाना था, बल्कि महिलाओं को पौधे बांटकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी था। इस गुरु वंदन कार्यक्रम में शिक्षाविद शकुंतला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि योगाचार्या सरोज कश्यप विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। दोनों ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर अपने अनुभव साझा किए और उपस्थित महिलाओं को प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान कृष्णा आर्या ने स्वामी दयानंद और योगगुरु स्वामी रामदेव को प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके विचारों को साझा किया। उन्होंने कहा कि गुरु का सम्मान करना और उनके विचारों को अपनाना हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होता है।
इस हवन और सत्संग में महिलाओं ने न केवल आध्यात्मिक लाभ उठाया, बल्कि पौधों का वितरण भी किया गया। यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित महिलाओं ने एकजुट होकर पौधों को रोपित किया, जिससे न केवल वातावरण को शुद्ध करने का प्रयास किया गया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा वातावरण बनाने का संकल्प भी लिया गया। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल महिलाओं में एकजुटता बढ़ती है, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी जाता है। इस आयोजन में भाग लेने वाली महिलाओं ने अपनी खुशी व्यक्त की और कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें मानसिक और आध्यात्मिक शांति मिलती है।
कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन आगे भी किए जाएंगे ताकि समाज में जागरूकता फैलाई जा सके और महिलाओं को सशक्त बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि हमें अपने पर्यावरण की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए और इस दिशा में छोटे-छोटे कदम उठाने चाहिए। इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं ने न केवल अपने लिए बल्कि समाज के लिए भी एक सकारात्मक संदेश दिया है। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल धार्मिक भावना को बल मिलता है, बल्कि समाज में एकता और सहयोग की भावना भी बढ़ती है। इस कार्यक्रम ने सभी को एक नई दिशा दिखाई है और आने वाले समय में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है।


















