US: कोविड-19 पर सवालों से बच रहे हैं डॉ. एंथनी फाउची? अमेरिकी सीनेट में अवमानना प्रस्ताव पर अगले हफ्ते वोटिंग

अमेरिका में कोविड-19 महामारी को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पूर्व शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फाउची ने सीनेट की सुनवाई के दौरान सवालों
अमेरिका में कोविड-19 महामारी को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पूर्व शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फाउची ने सीनेट की सुनवाई के दौरान सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया। अब रिपब्लिकन सांसद अगले सप्ताह उनके खिलाफ अवमानना प्रस्ताव पर मतदान कराने की तैयारी में हैं। यह मामला तब और गर्म हो गया जब फाउची ने अमेरिकी संविधान के पांचवें संशोधन का हवाला देते हुए अपनी चुप्पी बनाए रखी। उनके इस कदम ने कई सांसदों को नाराज कर दिया है, जो चाहते थे कि फाउची महामारी के दौरान अपनी भूमिका और निर्णयों के बारे में स्पष्टता प्रदान करें। रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य इस बात पर जोर दे रहे हैं कि फाउची को अपनी जिम्मेदारियों का सामना करना चाहिए और उन्हें जनता के सामने जवाबदेह होना चाहिए।
डॉ. एंथनी फाउची ने बुधवार को रिपब्लिकन बहुल सीनेट समिति के सामने पेश होकर अमेरिकी संविधान के पांचवें संशोधन (फिफ्थ अमेंडमेंट) का हवाला दिया और कोविड-19 महामारी से जुड़े सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया। उनका यह निर्णय कई सांसदों के लिए चौंकाने वाला था, क्योंकि वे फाउची से महामारी के दौरान उनके द्वारा लिए गए निर्णयों और उनके प्रभावों के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते थे। फाउची की चुप्पी ने इस बात को और भी जटिल बना दिया है कि कैसे महामारी के दौरान स्वास्थ्य नीतियों का निर्माण किया गया और किस प्रकार से निर्णय लिए गए। इस स्थिति ने सीनेट में तनाव बढ़ा दिया है और अब सभी की नजरें अगले सप्ताह होने वाले मतदान पर हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने फाउची की पूरी गवाही देखी। इस दौरान उन्होंने कोविड-19 के खिलाफ अपने पहले कार्यकाल में शुरू किए गए ऑपरेशन वॉर्प स्पीड का जिक्र किया और कहा कि महामारी एक बड़ी आपदा थी, लेकिन उनके मुताबिक फाउची ने इसमें मदद नहीं की। ट्रंप के इस बयान ने फाउची के प्रति और भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि क्या सीनेट में मतदान के दौरान फाउची के खिलाफ अवमानना प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है या नहीं। इस मामले ने न केवल राजनीतिक हलकों में, बल्कि आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बना दिया है।


















