Missing Girl Case: गोरखपुर में 10 वर्षीय बेटी की तलाश में पिता की उम्मीदें टूटीं

गोरखपुर के कोतवाली थाने के बाहर एक पिता की आंखों में केवल एक सवाल था, ''साहब, मेरी बेटी मिल गई क्या?'' यह सवाल उसने बार-बार अधिकारियों और पुलिसकर्मियों से पूछा,
गोरखपुर के कोतवाली थाने के बाहर एक पिता की आंखों में केवल एक सवाल था, ''साहब, मेरी बेटी मिल गई क्या?'' यह सवाल उसने बार-बार अधिकारियों और पुलिसकर्मियों से पूछा, लेकिन हर बार उसे जवाब मिला, ''कोशिश चल रही है।'' इस जवाब के साथ उसके चेहरे पर एक पल के लिए उम्मीद की किरण चमकी, लेकिन फिर वह मायूस हो गया। मंगलवार रात को उसकी 10 वर्षीय बेटी के लापता होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद परिवार में अनहोनी की आशंका बढ़ गई थी। परिवार का कहना था कि बच्ची बिना बताए कहीं नहीं जा सकती, लेकिन पुलिस ने शुरू में इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस को लगा कि बच्ची शायद रास्ता भटक गई होगी या किसी परिचित के घर चली गई होगी। इस दौरान परिवार की चिंता बढ़ती रही और रातभर वे अपनी बेटी की तलाश में व्याकुल रहे। सुबह तक कोई सुराग न मिलने पर अपहरण का मामला दर्ज किया गया। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई और एक निलंबित सिपाही को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।
सुबह करीब 11 बजे, ई-रिक्शा चालक पिता अपनी बेटियों के साथ कोतवाली पहुंचा। उसे उम्मीद थी कि पुलिस उसकी बेटी को जल्द ही खोज निकालेगी। उसकी बड़ी और छोटी बहनें भी थाने के गेट की ओर टकटकी लगाए बैठी रहीं। हर आती-जाती पुलिस गाड़ी और हर अधिकारी को देखकर उन्हें लगता कि शायद अब कोई अच्छी खबर मिलेगी, लेकिन समय बीतता गया और उनका इंतजार लंबा होता गया। पिता ने कहा कि चार साल पहले वह आजमगढ़ से अपने परिवार के साथ गोरखपुर आया था क्योंकि यहां का माहौल सुरक्षित माना जाता था। उसने मेहनत-मजदूरी करके अपने बच्चों का भविष्य संवारने का सपना देखा था, लेकिन अब उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि जिस पुलिस पर आम आदमी सबसे ज्यादा भरोसा करता है, उसी पर ऐसा आरोप लगेगा। उसकी आवाज में बेटी की चिंता के साथ टूटा हुआ विश्वास साफ झलक रहा था।


















