








राजू रंजन सोनी, पाटन (पलामू)। जहां एक ओर सरकार विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, वहीं पाटन प
राजू रंजन सोनी, पाटन (पलामू)। जहां एक ओर सरकार विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, वहीं पाटन प्रखंड के किशुनपुर स्थित प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) में बच्चों के लिए भेजी गई बैग, कॉपी, पेंसिल और एल्बेंडाजोल की दवा पिछले लगभग एक वर्ष से वितरण की प्रतीक्षा में पड़ी हुई है। यह स्थिति न केवल सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है, बल्कि बच्चों की शिक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि विद्यालयों में अध्ययनरत सभी छात्र-छात्राओं को समय पर शैक्षणिक सामग्री एवं अन्य सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए। लेकिन पाटन प्रखंड में योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाएं चिंताजनक हैं। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी बच्चों तक सामग्री नहीं पहुंच पाना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़ा कर रहा है।
हाल ही में प्रखंड शिक्षा समन्वय समिति की बैठक में अंचलाधिकारी आशीष कुमार ने प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी एन.के. सिंह और बीपीएम जरीना परवीन के बीच समन्वय की कमी की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि इसी कारण सरकारी योजनाएं अपेक्षित रूप से धरातल पर नहीं उतर पा रही हैं। बैठक के दौरान प्रखंड प्रमुख शोभा देवी ने पुस्तक वितरण की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी, जिस पर बीपीएम ने पुस्तक वितरण पूरा होने की बात कही। हालांकि, बुधवार तक पुस्तकों का वितरण किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिससे वितरण प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर कमियां हैं, जो बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी एन.के. सिंह पाटन समेत 11 प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसे में अतिरिक्त जिम्मेदारियों का असर कार्य निष्पादन पर पड़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस संबंध में उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। इधर, जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) अनुराग एक्का ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरे प्रकरण की जानकारी लेने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह स्थिति न केवल बच्चों के लिए बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए चिंता का विषय है, और इसे जल्द से जल्द सुलझाने की आवश्यकता है।
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