Tragic Loss in Hazaribagh: 15 वर्षीय हिमांशु की मौत से परिवार में छाया मातम

हजारीबाग से संवाद सूत्र। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर हर कोई गम में डूबा हुआ था। 15 वर्षीय हिमांशु राज का पार्थिव शरीर जैसे ही बाहर लाया गया, उसके पिता धर्मेंद्र कु
हजारीबाग से संवाद सूत्र। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर हर कोई गम में डूबा हुआ था। 15 वर्षीय हिमांशु राज का पार्थिव शरीर जैसे ही बाहर लाया गया, उसके पिता धर्मेंद्र कुमार की आंखों से आंसू बहने लगे। उन्होंने बेटे के चेहरे को देखते हुए बस इतना ही कहा, 'अब किसका चित्र बनाओगे बेटा...' हिमांशु चित्रकला में असाधारण प्रतिभा रखता था और अपने शिक्षकों के चित्र बनाकर गर्व से घर लाता था। आज उसी बेटे के बनाए चित्र घर की दीवारों पर सजे हैं, लेकिन वह हमेशा के लिए खामोश हो गया। पिता ने बताया कि हिमांशु पढ़ाई में भी अव्वल रहता था और अक्सर अपने भविष्य के सपनों के बारे में बात करता था। उसकी आकांक्षाएं अब अधूरी रह गई हैं। पिता की आंखों में आंसू थे जब उन्होंने कहा, 'बेटा, तूने तो हमें अकेला छोड़ दिया।'
पोस्टमार्टम हाउस में हिमांशु का बड़ा भाई भी खुद को संभाल नहीं पा रहा था। वह बार-बार रोते हुए कह रहा था, 'अब मैं किसके साथ खेलूंगा, किसके साथ घूमूंगा?' उसकी मासूमियत ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। वहीं, मां का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल था। उन्होंने सुबह बेटे को स्कूल भेजने के बाद उसके लिए खाना तैयार किया था और उसकी वापसी का इंतजार कर रही थीं। लेकिन दोपहर में बेटे की मौत की खबर ने उन पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया। वह बार-बार बेहोश हो रही थीं और जब होश में आतीं, तो बस यही कहतीं, 'जल्दी आ जाओ बेटा...' उनकी करुण पुकार सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखों में आंसू आ गए।



















