FDDI's New Initiative: पराली और जूट से बनेंगे जूते-कपड़े, मिलेगी वैश्विक पहचान; प्रदूषण भी होगा कम

चेतना राठौर, नोएडा। हर साल पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण के बढ़ते स्तर की शिकायतें सामने आती रही हैं। इस समस्या के समाधान के लिए फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट
चेतना राठौर, नोएडा। हर साल पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण के बढ़ते स्तर की शिकायतें सामने आती रही हैं। इस समस्या के समाधान के लिए फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई) ने फसलों से निकलने वाले वेस्ट से विभिन्न उत्पादों को तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह पहल भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा पारंपरिक और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने के लिए की जा रही है। एफडीडीआई का उद्देश्य जूट और पराली जैसे सामग्रियों का उपयोग कर ऐसे उत्पादों का निर्माण करना है, जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल हों, बल्कि ग्रामीण हस्तशिल्प और पारंपरिक कौशल को भी नई पहचान दें। इस दिशा में संस्थान के प्रोफेसर सोफा कवर, जूते, डिजाइनर ड्रैसेस और अन्य उत्पादों को तैयार करने के लिए शोध कर रहे हैं। इन उत्पादों को उद्योगों में उतारने की योजना है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों से तैयार किए गए उत्पादों को आधुनिक डिजाइन और तकनीक के साथ बाजार में लाया जा सके।
एफडीडीआई के इस प्रयास से जूट और पराली आधारित उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे प्रदूषण में कमी लाने में मदद मिलेगी। इन उत्पादों के निर्माण में रासायनिक पदार्थों का उपयोग बेहद कम या नहीं के बराबर होता है, जिससे यह पूरी तरह टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल विकल्प बनते हैं। इसके अलावा, चमड़े के उपयोग को कम करने पर भी जोर दिया जा रहा है। किसानों द्वारा हर साल पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या को देखते हुए अब उसी पराली को उपयोगी उत्पादों में बदलने की पहल की जा रही है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।



















