Himachal Bullying Study: हिमाचल में 15.6% किशोर बुलिंग के शिकार, परिवार और मजबूत दोस्ती बनी सबसे बड़ी सुरक्षा

बच्चों के लिए एक अच्छा दोस्त केवल खेलने का साथी नहीं होता, बल्कि मुश्किल समय में उनकी सबसे बड़ी ढाल भी बन सकता है। हिमाचल प्रदेश के किशोरों पर किए गए एक अध्ययन
बच्चों के लिए एक अच्छा दोस्त केवल खेलने का साथी नहीं होता, बल्कि मुश्किल समय में उनकी सबसे बड़ी ढाल भी बन सकता है। हिमाचल प्रदेश के किशोरों पर किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि माता-पिता के साथ मजबूत भावनात्मक जुड़ाव और सहयोगी मित्र समूह बच्चों को बुलिंग, अर्थात साथियों द्वारा बार-बार परेशान करने, से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अध्ययन के अनुसार, जिन बच्चों को अपने परिवार का भरोसा और अच्छे दोस्तों का साथ मिलता है, उनके बुलिंग का शिकार बनने या उसमें शामिल होने की संभावना अपेक्षाकृत कम रहती है। यह अध्ययन ममता हेल्थ इंस्टीट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड, नई दिल्ली के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है, जिसमें दीपिका बहल, देविका मेहरा, निकिता पटेल, सरोज मोहंती, सुभा शंकर दास, ऋषि गर्ग, गौरव सेठी, अंजलि चौहान और सुनील मेहरा जैसे विशेषज्ञ शामिल रहे हैं।
यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका पीएलओएस वन में 2 अप्रैल 2026 को प्रकाशित हुआ। शोध के लिए नवंबर-दिसंबर 2023 के दौरान हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों के 204 सरकारी स्कूलों में 13 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 7563 विद्यार्थियों से मानकीकृत प्रश्नावली के माध्यम से जानकारी जुटाई गई। इस अध्ययन में पाया गया कि 15.6 प्रतिशत विद्यार्थी बुलिंग का शिकार पाए गए, जबकि 18.41 प्रतिशत किशोर शारीरिक या साइबर बुलिंग जैसी घटनाओं में किसी न किसी रूप में शामिल रहे। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जिन बच्चों का अपने माता-पिता के साथ बेहतर संवाद और भावनात्मक जुड़ाव था, उनमें बुलिंग का खतरा कम था।



















