One Teacher in One School: देश के 1 लाख से ज्यादा स्कूलों में सिर्फ 1 टीचर

देश में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और 'सब पढ़ें, सब बढ़ें' के नारे के बीच एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए आ
देश में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और 'सब पढ़ें, सब बढ़ें' के नारे के बीच एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत में एक लाख से अधिक स्कूल ऐसे हैं जो केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। यह स्थिति न केवल सरकारी स्कूलों में बल्कि निजी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में भी देखी जा रही है। शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी के अनुसार, यह आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात को सही दिखाने के बावजूद, जमीनी स्तर पर शिक्षकों की भारी कमी और असमान तैनाती की सच्चाई को उजागर करता है। आंध्र प्रदेश इस मामले में सबसे आगे है, जहां 16,357 स्कूल केवल एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं, जो कि कुल राष्ट्रीय आंकड़े का 16% से अधिक है। इसके अलावा, झारखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी स्थिति चिंताजनक है। इन सात राज्यों में मिलकर देश के कुल सिंगल-टीचर स्कूलों का लगभग 65% हिस्सा है।
इस समस्या का दायरा केवल कुछ राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में फैली हुई है। तेलंगाना, तमिलनाडु, असम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी सिंगल-टीचर स्कूलों की संख्या चिंताजनक है। दूसरी ओर, केरल, नागालैंड, सिक्किम, लद्दाख, दिल्ली और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह जैसे कुछ राज्यों में स्थिति थोड़ी बेहतर है, जहां सिंगल-टीचर स्कूलों की संख्या बहुत कम है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत देश में औसतन छात्र-शिक्षक अनुपात मानकों के भीतर है, लेकिन वास्तविकता यह है कि एक ही शिक्षक को स्कूल की सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है, जिसमें मिड-डे मील की देखरेख और विभिन्न कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढ़ाना शामिल है।



















