Timeless Tale: फणीश्वरनाथ रेणु की कालजयी कहानी 'लाल पान की बेगम'

बिरजू की मां अपने आंगन में शकरकंद उबालते हुए अपने बेटे के शैतानी हरकतों से परेशान थी। सात साल का बिरजू, जो अपनी मां के गुस्से का शिकार हो रहा था, आंगन में लोट-प
बिरजू की मां अपने आंगन में शकरकंद उबालते हुए अपने बेटे के शैतानी हरकतों से परेशान थी। सात साल का बिरजू, जो अपनी मां के गुस्से का शिकार हो रहा था, आंगन में लोट-पोट कर मिट्टी मल रहा था। उसकी मां चंपिया के लौटने का इंतजार कर रही थी, जो नाच देखने के लिए गई थी। इस बीच, पड़ोस की मखनी फुआ ने बिरजू की मां को नाच देखने जाने के लिए प्रेरित किया।
बिरजू की मां ने गुस्से में कहा कि उसके पति ने नाच दिखाने का वादा किया था, लेकिन चंपिया अब तक नहीं लौटी। मखनी फुआ ने बिरजू की मां का मजाक उड़ाते हुए कहा कि वह खुद को इतना बड़ा समझती है कि चार मन पाट के पैसे भी नहीं दे सकती। बिरजू की मां ने अपने गुस्से को दबाते हुए बागड़ पर अपना गुस्सा उतारने का सोचा, लेकिन मखनी फुआ की बातें सुनकर रुक गई।
जंगी की पुतोहू ने भी बिरजू की मां पर तंज कसते हुए कहा कि उसे भी साड़ी पहनकर अपने नाम से जमीन का पर्चा कटवाना चाहिए। यह सुनकर बिरजू की मां को गुस्सा आया, लेकिन उसने चुप रहना ही बेहतर समझा। जंगी की पुतोहू की बातें सुनकर बिरजू की मां ने अपनी बेटी चंपिया को बुलाया, जो नाच देखने के लिए तैयार हो रही थी।
बिरजू ने अपनी मां के गुस्से को भांपते हुए शकरकंद छीलने की कोशिश की, लेकिन उसकी मां ने उसे डांटते हुए कहा कि वह काम करने में आलसी है। बिरजू ने अपनी बहन से एक शकरकंद चुराने की कोशिश की, लेकिन उसकी मां ने उसे रोक दिया। इस बीच, चंपिया ने अपनी मां को बताया कि गाड़ी नहीं मिली है, जिससे बिरजू की मां का चेहरा उतर गया।


















