Organ Donation Hesitation in Jammu and Kashmir: ब्रेन डेड मरीजों के स्वजन नहीं दे रहे सहमति

जम्मू-कश्मीर में अंगदान को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन ब्रेन डेड मरीजों के अंगदान में अभी भी कोई खास सफलता नहीं मिल रही है। स्टेट आर्गन और ट्रां
जम्मू-कश्मीर में अंगदान को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन ब्रेन डेड मरीजों के अंगदान में अभी भी कोई खास सफलता नहीं मिल रही है। स्टेट आर्गन और ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन के प्रयासों के बावजूद, प्रदेश में किडनी प्रत्यारोपण के लिए प्रतीक्षा सूची लंबी होती जा रही है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में राजकीय मेडिकल कालेज जम्मू को किडनी प्रत्यारोपण की मंजूरी मिली थी, जिसके बाद 36 किडनी प्रत्यारोपण किए गए हैं, लेकिन ये सभी दान रिश्तेदारों द्वारा किए गए हैं। इसी प्रकार, श्रीनगर मेडिकल कालेज में भी नौ किडनी प्रत्यारोपण हुए हैं, लेकिन ब्रेन डेड मरीजों के अंगदान की कमी बनी हुई है।
शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज सौरा में वर्ष 2022 के बाद सबसे अधिक 180 किडनी प्रत्यारोपण हुए हैं, लेकिन यहां भी ब्रेन डेड मरीजों के अंगदान की कोई घटना नहीं हुई है। वर्तमान में स्टेट आर्गन और ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन के पास दो दर्जन से अधिक मरीजों की प्रतीक्षा सूची है, जो किडनी प्रत्यारोपण के लिए इंतजार कर रहे हैं। जीएमसी जम्मू में ब्रेन डेड घोषित किए गए मरीजों की संख्या पिछले दो वर्षों में दस रही है, लेकिन उनके स्वजन अंगदान के लिए सहमति नहीं दे रहे हैं। ट्रांसप्लांट कोआर्डिनेटर इरफान लोन के अनुसार, जागरूकता के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है।



















