Panchayat elections in Bihar: गोपालगंज जिले में 7000 की आबादी पर बन सकती है नई पंचायत

गोपालगंज जिले में आगामी पंचायत चुनावों की तैयारियों के तहत परिसीमन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। प्रशासन ने जिले की सभी 230 ग्राम पंचायतों के मुख्यालयों का नि
गोपालगंज जिले में आगामी पंचायत चुनावों की तैयारियों के तहत परिसीमन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। प्रशासन ने जिले की सभी 230 ग्राम पंचायतों के मुख्यालयों का निर्धारण कर लिया है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार, पंचायतों की मैपिंग की गई है और उनके मुख्यालय चिह्नित किए गए हैं। अब आयोग की विस्तृत गाइडलाइन का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद पंचायतों की सीमाओं के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। पंचायतों के मुख्यालय के निर्धारण में वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों और राजस्व गांवों को मुख्य आधार बनाया गया है। प्रत्येक पंचायत को एक राजस्व ग्राम मानते हुए उसका मुख्यालय तय किया गया है, जिसमें अधिक आबादी वाले राजस्व ग्राम को प्राथमिकता दी गई है।
परिसीमन के दौरान पंचायतों के स्वरूप में बदलाव की संभावना बनी हुई है। पंचायतों की सीमाएं तय करते समय प्राकृतिक संसाधनों, सड़क, रेलवे लाइन और स्पष्ट पहचान वाले सार्वजनिक संस्थानों को ध्यान में रखा जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, परिसीमन में न्यूनतम सात हजार की आबादी पर एक पंचायत के गठन का प्रावधान रखा जा सकता है। यदि दो राजस्व गांवों की कुल आबादी सात हजार या उससे अधिक होती है, तो उन्हें मिलाकर एक पंचायत का गठन किया जा सकता है। हालांकि, एक राजस्व गांव को दो पंचायतों में बांटने की अनुमति नहीं होगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि राजस्व गांव पूरी तरह से किसी एक पंचायत का हिस्सा रहे।
जिले में वर्तमान में 1538 राजस्व गांव हैं और परिसीमन के बाद जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति के आधार पर कुछ पंचायतों का क्षेत्र बढ़ या घट सकता है। वर्तमान में कटेया में 11, पंचदेवरी में नौ, विजयीपुर में 13, भोरे में 17, फुलवरिया में 12, उचकागांव में 14, हथुआ में 18, थावे में 11, गोपालगंज में 16, कुचायकोट में 31, मांझा में 20, बरौली में 23, सिधवलिया में 13 और बैकुंठपुर में 22 ग्राम पंचायतें हैं। परिसीमन के बाद जिले में पंचायतों की संख्या में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पंचायतों की मैपिंग कराकर उनके मुख्यालय का निर्धारण कर दिया गया है। आगे की कार्रवाई के लिए आयोग की गाइडलाइन का इंतजार किया जा रहा है।
















