Census in Uttarakhand: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में 1 सितंबर से जनगणना शुरू, पहली बार जातिगत जानकारी भी होगी शामिल

उत्तराखंड के दुर्गम और बर्फ से ढके क्षेत्रों में जनगणना का कार्य 1 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। यह जनगणना विशेष रूप से उन तीन शहरों और 131 गांवों में की जाएगी
उत्तराखंड के दुर्गम और बर्फ से ढके क्षेत्रों में जनगणना का कार्य 1 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। यह जनगणना विशेष रूप से उन तीन शहरों और 131 गांवों में की जाएगी, जो सर्दियों में हिमाच्छादित रहते हैं। इस जनगणना का उद्देश्य लगभग 52 हजार की जनसंख्या की गणना करना है, जो 30 सितंबर तक चलेगा। इसके अलावा, प्रदेशभर में जनगणना के दूसरे चरण की शुरुआत 17 अगस्त से होगी, जिसमें 31 अगस्त तक स्वगणना का कार्य पूरा किया जाएगा। उत्तराखंड उन चार हिमालयी राज्यों में शामिल है, जहां उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जनगणना का कार्य निर्धारित समय से पहले पूरा किया जाना है। अन्य तीन राज्य लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश हैं। इन क्षेत्रों में बर्फबारी के दौरान जनगणना में आने वाली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
जनगणना की विधिवत शुरुआत बर्फबारी वाले क्षेत्रों से की जाएगी। भारत के रजिस्ट्रार जनरल ने अगले वर्ष 2027 में जनगणना के दूसरे चरण के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। 1 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रदेश के चार जिलों चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के 131 गांवों के साथ ही केदारनाथ, बदरीनाथ और गंगोत्री जैसे शहरी निकाय क्षेत्रों में भी जनगणना की जाएगी। राज्य में जनगणना निदेशालय ने इस संबंध में सभी आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस दौरान घर-घर जाकर जनसंख्या की गिनती की जाएगी। इसके बाद 1 से 5 अक्टूबर तक संशोधन चरण (रिविजनल राउंड) का कार्य किया जाएगा। इन पहाड़ी इलाकों के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
















