Court Rejects Petition on Buddhist Caves Under Somnath Temple: सोमनाथ मंदिर के नीचे बौद्ध गुफा संबंधी याचिका गुजरात हाई कोर्ट ने ठुकराई

राज्य ब्यूरो, अहमदाबाद। गुजरात उच्च न्यायालय ने सोमनाथ मंदिर के नीचे बौद्ध गुफा होने के दावे को ठुकरा दिया है। यह दावा वर्ष 2017 में आईआईटी गांधीनगर द्वारा किए
राज्य ब्यूरो, अहमदाबाद। गुजरात उच्च न्यायालय ने सोमनाथ मंदिर के नीचे बौद्ध गुफा होने के दावे को ठुकरा दिया है। यह दावा वर्ष 2017 में आईआईटी गांधीनगर द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के आधार पर किया गया था। याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने इसे पब्लिसिटी स्टंट मानते हुए पहले ही दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके बावजूद वरिष्ठ अधिवक्ता रत्ना वोरा ने पुनर्याचिका दायर कर सुनवाई की मांग की। उन्होंने कोर्ट में कहा कि आईआईटी गांधीनगर के सर्वे में सोमनाथ मंदिर के नीचे बौद्ध गुफा और अवशेष होने का उल्लेख किया गया है। कोर्ट ने इस दावे की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता से ठोस दस्तावेजों की मांग की। याचिकाकर्ता ने कहा कि सूचना के अधिकार के तहत रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन सोमनाथ ट्रस्ट ने इसे अपनी संपत्ति बताते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया। इस पर कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस आधार के इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायाधीश डी एन रे की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता ने बताया कि इस मामले में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और मुंबई उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश नरवडे उनका पक्ष रखेंगे। हालांकि, खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता के लिए केस को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इससे पहले डॉ. विलास तुकाराम खरात द्वारा दायर की गई याचिका को जून 2026 में खारिज कर दिया गया था। उस समय भी हाईकोर्ट ने याचिका को गुमराह करने वाली बताते हुए दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इसी मामले में एडवोकेट वोरा ने पुनर्याचिका दाखिल की थी। राज्य सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए इसे पब्लिसिटी पाने के इरादे से की गई याचिका बताया।
















