Court ruling on disputed will: राजस्व अधिकारी वसीयत के आधार पर नामांतरण नहीं कर सकते

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा कि यदि वसीयत की वैधता को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तो राजस्व अधि
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा कि यदि वसीयत की वैधता को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तो राजस्व अधिकारी उस वसीयत के आधार पर भूमि का नामांतरण नहीं कर सकते। इस मामले में पक्षकारों को अपने अधिकारों की स्पष्टता के लिए सिविल कोर्ट का सहारा लेना होगा। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश बैतूल जिले के रम्प्यारी एवं अन्य बनाम बसंती सहित अन्य के मामले में दिया। यह निर्णय उन मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शन प्रदान करता है जहां वसीयत को लेकर विवाद होता है।
यह मामला बैतूल जिले के ग्राम सकड़ेही और उसके आसपास की भूमि से संबंधित है। याचिकाकर्ता रम्प्यारी, जो सज्जनलाल की पत्नी हैं, मुकेश, जो सज्जनलाल का पुत्र है, और सरबतिबाई, जो मिस्त्री की पत्नी हैं, ने 11 जनवरी 1989 की एक कथित वसीयत के आधार पर विवादित भूमि के नामांतरण का दावा किया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अनिरुद्ध कुमार मिश्रा ने कोर्ट में अपनी बात रखी, जबकि प्रतिवादियों की ओर से रवींद्र कुमार तिवारी ने पैरवी की। प्रतिवादी बसंती और अन्य ने इस वसीयत को स्वीकार नहीं किया और इसे फर्जी एवं मनगढ़ंत बताते हुए चुनौती दी। इसके बावजूद प्रारंभिक राजस्व अधिकारियों ने नामांतरण संबंधी आदेश पारित किए थे, लेकिन बाद में बोर्ड ऑफ रेवन्यू ने इन आदेशों को निरस्त कर दिया।
















