Delhi HC Denies Halt on HPV Vaccine: किशोरियों के टीकाकरण पर कहा- तत्काल नुकसान का कोई सबूत नहीं

नई दिल्ली में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को किशोरियों को दिए जाने वाले ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीन पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया। अदालत ने केंद्
नई दिल्ली में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को किशोरियों को दिए जाने वाले ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीन पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया। अदालत ने केंद्र सरकार के जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए यह स्पष्ट किया कि वैक्सीन देने से किसी भी प्रकार का तत्काल नुकसान नहीं होता है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार के डेटा के अनुसार, कम उम्र की लड़कियों को यह वैक्सीन देने में कोई हानि नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि वह किशोरियों के लिए इस वैक्सीन के औचित्य पर बाद में विचार करेगी, लेकिन फिलहाल वैक्सीन देने पर रोक लगाने का कोई कारण नहीं है। अदालत ने यह टिप्पणी उस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें एचपीवी वैक्सीनेशन कार्यक्रम को माता-पिता की जानकारी और सहमति के बिना लागू करने का आरोप लगाया गया था।
सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित एडिशनल सालिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि दुनिया भर में 55 करोड़ से अधिक लोगों को इस वैक्सीनेशन से लाभ हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार वैक्सीनेशन के दौरान सभी उचित और पर्याप्त उपाय कर रही है। इस पर अदालत ने कहा कि एचपीवी वैक्सीन देने को रोकने का कोई ठोस कारण नहीं दिखता। याचिकाकर्ता डॉ. सुजाता मित्तल ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि यह वैक्सीनेशन कार्यक्रम किशोरियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, जिसमें व्यक्तिगत और शारीरिक स्वतंत्रता के अधिकार शामिल हैं।
















