Forced Religious Conversion Law: महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू

महाराष्ट्र में जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए एक नया कानून लागू किया गया है, जिसका नाम 'महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' है। इस कानून को राष्ट्र
महाराष्ट्र में जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए एक नया कानून लागू किया गया है, जिसका नाम 'महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' है। इस कानून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार ने आधिकारिक रूप से प्रकाशित किया है। यह कानून उन मामलों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है, जहां लोग धोखाधड़ी, लालच या शादी के झांसे में आकर धर्म परिवर्तन करते हैं। विधानमंडल के दोनों सदनों ने इस कानून को मार्च 2023 में पारित किया था, और राष्ट्रपति की सहमति के बाद इसे 30 जुलाई को राज्य के राजपत्र में नोटिफाई किया गया। अब यह कानून प्रभावी हो गया है और इसके तहत धर्म परिवर्तन के लिए कुछ विशेष प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होगा।
इस नए कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देनी होगी। इसके अलावा, धर्म परिवर्तन के बाद की प्रक्रियाओं का पालन करना भी आवश्यक होगा। यदि कोई व्यक्ति बल, दबाव, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, या गलत बयानी के जरिए धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे दंडनीय अपराध माना जाएगा। इस कानून के तहत पहली बार अपराध करने पर आरोपी को 7 साल तक की जेल हो सकती है, जबकि दोबारा अपराध करने पर सजा बढ़ाकर 10 साल तक की जा सकती है।
















