High Court's Strict Stance on UAPA Case Delays: यूएपीए मामले की सुनवाई में देरी पर हाई कोर्ट सख्त, विशेष अदालत से मांगी रिपोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दो आतंकियों के खिलाफ चल रहे यूएपीए मामले की सुनवाई में हो रही लगातार देरी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने विशेष एनआइ
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दो आतंकियों के खिलाफ चल रहे यूएपीए मामले की सुनवाई में हो रही लगातार देरी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने विशेष एनआइए-एटीएस अदालत, लखनऊ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि हाई कोर्ट के बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद मुकदमे की सुनवाई में अपेक्षित प्रगति क्यों नहीं हो रही है। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने हाई कोर्ट के पूर्व आदेशों का पालन करने में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मुकदमे में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है, जो संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत आरोपितों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए चिंता का विषय है।
मामले में आरोपित अंसाद बदरुद्दीन और फिरोज 17 फरवरी 2021 से जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। हाई कोर्ट ने सात दिसंबर 2022 को ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि मुकदमे की सुनवाई में तेजी लाते हुए इसे यथासंभव एक वर्ष के भीतर निपटाया जाए। इसके बाद जनवरी 2024 में भी अदालत ने आदेश दिया था कि किसी गवाह की मुख्य परीक्षा पूरी होने के बाद उसकी जिरह तुरंत कराई जाए और सभी गवाहों की मुख्य परीक्षा पूरी होने तक जिरह लंबित न रखी जाए।
















