Justice in Hardoi after 48 Years: चुनावी हिंसा मामले में 3 आरोपी बरी

हरदोई में 48 वर्ष पुराने चुनावी हिंसा के मामले में न्यायालय ने तीन आरोपितों को बरी कर दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेन्द्र यादव की अदालत ने इस मामले म
हरदोई में 48 वर्ष पुराने चुनावी हिंसा के मामले में न्यायालय ने तीन आरोपितों को बरी कर दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेन्द्र यादव की अदालत ने इस मामले में सुनवाई के बाद यह निर्णय लिया। यह मामला 1978 में सहकारी समिति के चुनाव के दौरान हुई फायरिंग और मारपीट से संबंधित है। अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा। इस मामले में जेल में बंद आरोपित शिव सिंह की तत्काल रिहाई का भी आदेश दिया गया है।
इस मामले की शुरुआत 20 अप्रैल 1978 को हुई, जब लोनार थाना क्षेत्र (वर्तमान सांडी थाना) के सैतियापुर गांव में सहकारी समिति के डेलीगेट चुनाव के दौरान विवाद उत्पन्न हुआ। इस विवाद के चलते फायरिंग और मारपीट की घटनाएं हुईं। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 447, 448, 449 और 307 के तहत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया में तीन आरोपितों शिवराम सिंह, रामनरेश सिंह और रशाल सिंह की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तीन प्रत्यक्षदर्शी गवाहों को पेश किया, लेकिन सभी गवाह अपने पहले के बयानों से मुकर गए। उन्होंने अदालत में कहा कि चुनाव के समय घटनास्थल पर भारी भीड़ थी और उन्होंने किसी भी आरोपित को फायरिंग या मारपीट करते नहीं देखा। अदालत ने इस आधार पर माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। इसके परिणामस्वरूप तीनों आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया गया। यह मामला न केवल न्याय की लंबी प्रक्रिया को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे समय के साथ गवाहों की याददाश्त और साक्ष्य कमजोर हो जाते हैं।
















