Malnutrition Treatment Center in Hazaribagh: करोड़ों की योजना खंडहर में तब्दील, बच्चों के अधिकारों की अनदेखी

हजारीबाग में कुपोषण उपचार केंद्र की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यह केवल एक अधूरे सरकारी भवन की कहानी नहीं है, बल्कि उन बच्चों के अधिकारों की अनदेखी का प्रतीक है, ज
हजारीबाग में कुपोषण उपचार केंद्र की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यह केवल एक अधूरे सरकारी भवन की कहानी नहीं है, बल्कि उन बच्चों के अधिकारों की अनदेखी का प्रतीक है, जिनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये की योजना बनाई थी। दीपूगढ़ा में स्थित यह दो मंजिला केंद्र वर्षों से अधूरा खड़ा है। भवन की ढलाई तो पूरी हो गई, लेकिन प्लास्टर, फिनिशिंग और अन्य आवश्यक कार्य अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। निर्माण कार्य रुकने के बाद भवन वीरान होता गया और अब इसके कई हिस्सों पर अतिक्रमण हो चुका है। जिस स्थान पर कुपोषित बच्चों का उपचार होना था, वहां अब अन्य लोग बसने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, यह भवन ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के माध्यम से बनाया जा रहा था और इसका निर्माण कार्य अंतिम चरण में था। लेकिन अचानक निर्माण कार्य बंद हो गया और वर्षों बीत जाने के बाद भी न तो इसे फिर से शुरू किया गया और न ही इसे सुरक्षित रखने के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए। इस प्रकार करोड़ों रुपये की सरकारी योजना अधूरी रह गई और भवन अतिक्रमण की चपेट में आ गया। इस केंद्र में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के लिए विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना थी, जिसमें चिकित्सक, स्टाफ नर्स, पोषण विशेषज्ञ और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती का प्रावधान था। यदि यह केंद्र समय पर शुरू हो जाता, तो जिले के सैकड़ों कुपोषित बच्चों को बेहतर इलाज मिल सकता था।
















