Manish Tewari's Adjournment Proposals: दलबदल विरोधी कानून पर बहस की आवश्यकता

संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र के दौरान, जहां विपक्ष का ध्यान छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और अयोध्या चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा है, वहीं कांग्रेस के सीन
संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र के दौरान, जहां विपक्ष का ध्यान छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और अयोध्या चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा है, वहीं कांग्रेस के सीनियर नेता और चंडीगढ़ से लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने लगातार एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा की मांग की है। यह मुद्दा है दलबदल विरोधी कानून, जिसे लेकर तिवारी ने अब तक 14 स्थगन प्रस्ताव दिए हैं। इनमें से 13 प्रस्तावों में उन्होंने दलबदल विरोधी कानून में सुधार पर व्यापक चर्चा की मांग की है। केवल एक प्रस्ताव 28 जुलाई को पेश किया गया था, जिसमें निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल पर चर्चा की गई थी। स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से संसद सदस्य, स्पीकर की मंज़ूरी मिलने पर, सदन के निर्धारित कामकाज को रोककर किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे पर चर्चा की मांग कर सकते हैं।
इंडिया टुडे डिजिटल से बात करते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि दलबदल विरोधी कानून में व्यापक सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि यह भारत के संसदीय लोकतंत्र के सामने मौजूद कई समस्याओं की जड़ में है। उन्होंने दलबदल को 'जनता के भरोसे के साथ धोखा' बताते हुए कहा कि विधायक एक राजनीतिक दल के जनादेश पर चुने जाते हैं, लेकिन बाद में अपना पाला बदल लेते हैं, जिससे चुनावी जनादेश कमजोर होता है। तिवारी ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि आज की संसद मूल रूप से 2024 के आम चुनाव के जनादेश से अलग है और मौजूदा राजनीति तेजी से सत्ता में बैठे लोगों की मर्ज़ी से चल रही है।
















